5. स्कूल और कॉलेज : अब 'पाठशाला' या 'विद्यालय' शब्द का इतना प्रचलन नहीं रहा। 'स्कूल' सबसे ज्यादा प्रचलित शब्द है। यह सब मैकाले की करतूत है। उसी ने सबसे पहले संस्कृत की सभी पाठशालाएं बंद करवाई थीं। कॉन्वेंट तो मैकाले के जमाने से है। उसने ही कहा था कि इस देश को तोड़ना है और ईसाई धर्म स्थापित करना है तो सबसे पहले यहां की भाषा को समाप्त करो। उसके ही कार्य को आज अंग्रेजी स्कूल के लोग अच्छी तरह आगे बढ़ा रहे हैं। भारत के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर एक शोध कर लीजिए, आपको हकीकत का पता लग जाएगा।

6. बाजारवाद : शॉपिंग मॉल, तमाम दुकानों के होर्डिंग और लगभग सभी प्रॉडक्ट से हिन्दी को हटा दिया गया है। पाश्चात्य जैसा दिखने की होड़ के चलते अब अंग्रेजी में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाते हैं। त्योहारों के बाजार में भी हिन्दी को अब रोमन कर दिया गया है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने पहले खूब हिन्दी में विज्ञापन छपवाए या प्रसारित करवाए, क्योंकि तब लोग इतनी अंग्रेजी नहीं जानते थे जितनी कि आज। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मकसद इसके पीछे हिन्दी का प्रेम नहीं बल्कि आम आदमी तक अपने उत्पादों को पहुंचाना था, लेकिन आज हिन्दी में अधिकतर अंग्रेजी मिली हुई है इसीलिए अब कुछ विज्ञापन सीधे-सीधे अंग्रेजी में ही दिए जाते हैं।

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