webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia

हिन्दी भाषा के 10 दुश्मन, जानिए कौन...

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
Widgets Magazine
जिन्हें हिन्दी की सेवा करना चाहिए थी, वे अब हिन्दी को ही खत्म करने में लगे हैं। हालांकि निम्नलिखित 10 हिन्दी के दोस्त बनकर दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। भारत सरकार को चाहिए कि वे हिन्दी एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण के पक्ष में इन दुश्मनों पर लगाम लगाएं, क्योंकि यह देश स्वानुशासन खो चुका है। इस आलेख में भी आपको बहुत-सी जगह अंग्रेजी और फारसी के शब्द मिल जाएंगे, जो कि अब हमारी मजबूरी बन गए हैं, जैसे कि 'मजबूरी' या 'जरूरत' को ही लें।
आज आवश्यकता यह है कि हम अंग्रेजी व अंग्रेजी बोलने वालों को ऊंचा समझना बंद करें और इसे केवल एक विदेशी भाषा की तरह ही सीखें व उतना ही सम्मान दें। अनजाने में राष्ट्रभाषा न बनाएं। यदि आप हिन्दुस्तानी हैं तो आपस में हिन्दी या किसी और भारतीय भाषा में बात करें। वरना हमें पता भी नहीं लगेगा और हम अपनी भाषा अनजाने में भूल जाएंगे। कहते हैं जिस चीज का अभ्यास जितना करो, वो उतनी ही मजबूत होगी और जिसका जितना कम, वो चीज उतनी ही कमजोर होती जाएगी।
 
1. अखबार : हिन्दी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है हिन्दी के अखबारों ने। उन्होंने जान-बूझकर अंग्रेजी, अरबी और फारसी के शब्द अखबारों में ठूंसकर उन्हें प्रचलन में ला दिया। उर्दू भी अब पहले जैसी नहीं रही, उसे भी जान-बूझकर अरबी बनाया जा रहा है। नई पीढ़ी के लिए अब वे ही शब्द सबसे महत्वपूर्ण बन गए और यह सब कुछ हुआ है बस कुछ ही सालों में। तथाकथित रूप से पत्रकारिता पढ़कर आए या नहीं आए पत्रकारों ने सब कुछ नष्ट कर दिया। अच्‍छी हिन्दी की बात करना तो किसी हिन्दी साहित्यकार के बस की ही बात रह गई है। पहले साहित्यकार या हिन्दी का श्रेष्ठ शिक्षक ही पत्रकार बनता था लेकिन अब ऐसा नहीं है।

इन नवागत पत्रकारों को न तो आजादी के आंदोलन का इतिहास मालूम है और न ही संपूर्ण भारत के प्राचीन इतिहास की जानकारी। ये बस अच्छी-खासी अंग्रेजी पढ़कर आए हैं और अंग्रेजी के दम पर ही नौकरी कर रहे हैं। जिस व्यक्ति को इतिहास की अच्छे से जानकारी नहीं है, उसे न तो पत्रकार बनाना चाहिए, न राजनीतिज्ञ और न ही उसे प्रशासनिक स्तर का कोई पद देना चाहिए। आजकल पत्रकार बनना तो बहुत ही आसान है, इस देश में कई हॉकर पत्रकार बन गए हैं। तो क्या भविष्य में पत्रकारिता सबसे घटिया पेशा माना जाएगा? पेशा? हां, पेशा ही तो है पत्रकारिता अब सेवा कहां रहा।

अगले पन्ने पर जारी...
 
Read more on : हिन्दी अखबार न्यूज चैनल अंग्रेजी स्कूल English School हिन्द सम्मेलन Hind Conference Hindi Newspapers News Channels