2. टेलीविजन : हिन्दी समाचार चैनल अब ताजा खबर नहीं, ब्रेकिंग न्यूज चलाते हैं। उनकी बहस और उनके समाचारों में अधिकतर अंग्रेजी के शब्द इस्तेमाल होते हैं। उनके विज्ञापनों में भी भरपूर तरीके से अंग्रेजी होती है। अब हिन्दी के अंक तो अखबार और टेलीविजन की सामग्री (कंटेंट) से हट ही गए हैं। दूसरी ओर रियलिटी शो या अन्य पारिवारिक धारावाहिकों में धुआंधार अंग्रेजी बोली जाती है जिसके चलते हमारे सामने बड़ी हो रही पीढ़ी निश्चित ही हिन्दी नहीं सीख पाएगी, क्योंकि व्यक्ति भाषा तो अपने आसपास के माहौल से ही तो सीखता है।

बॉलीवुड और टेलीविजन मिलकर आने वाले कुछ वर्षों में हिन्दी को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे। हालांकि आप भले ही यह कहते रहें कि आज भी बॉलीवुड हिन्दी सिनेमा है। आज आपको पता चल रहा है कि हिन्दी कितनी हिंग्लिश हो गई है तो कल भी आपको पता चलेगा कि हम देवनागरी में लिखते जरूर हैं लेकिन वह हिन्दी नहीं है।
3. बॉलीवुड : एक समय था जबकि बॉलीवुड के कारण ही हिन्दी को देश-विदेश में बढ़ावा मिला, लेकिन अब यही बॉलीवुड हिन्दी की हत्या करने में लगा है। अब बॉलीवुड की अधिकतर फिल्मों के नाम हिन्दी में नहीं होते हैं और अधिकतर फिल्मों में हिन्दी नहीं, हिंग्लिश बोली जाती है। अभिनेत्री और अभिनेताओं के साक्षात्कार और उनके संवाद देखकर आपको निश्चित ही दुख होगा यदि आप हिन्दीप्रेमी हैं तो। हिंग्लिश हो चुका बॉलीवुड कब इंग्लिश हो जाएगा, आपको पता भी नहीं चलेगा।

हालांकि वे हिन्दी का ही सत्यानाश नहीं कर रहे हैं, वे तो भारतीय संस्कृति का भी सत्यानाश कर रहे हैं। अब तो फिल्मों में अभिनेत्रियों को वर्जनाएं तोड़ने के लिए उकसाया जाता है। लड़कियों को बीयर और सिगरेट पीना सिखाया जा रहा है। जब नैतिकता टूटेगी तभी तो नई भाषा और संस्कृति का विकास होगा। बॉलीवुड यह काम अच्छे से कर रहा है। वह नैतिकता की सभी सीमाएं लांघ रहा है। आज आप मेट्रोसिटी या बड़े शहरों के युवाओं के हाल, चाल और ढाल देखिए। यह सब हो रहा है आधुनिक बनने के नाम पर।
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