म्यांमार : म्यांमार में बौद्ध धर्म कमोबेश उतना ही प्राचीन है जितना दूसरे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में। श्रीलंका की ही तरह म्यांमार में भी बौद्धों का सत्ता राजनीति में दखल और कभी प्रत्यक्ष कभी परोक्ष वर्चस्व रहा है। म्यांमार में बहुसंख्यक बौद्ध आबादी को रोहिंग्या मुसलमान खटकते हैं। खटकने के कई कारण है जिसमें से एक यह है कि उन्हें बांग्लादेशी माना जाता है और उन पर बांग्लादेश के कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों से जुड़े होने के आरोप भी है। बांग्लादेश में बौद्धों पर लगातार हुए हमले की प्रतिक्रिया में बार्मा में यह हिंसक युग शुरु हुआ। बांग्लादेश में चकमा पर्वतों के बौद्ध आदिवासियों को अपनी जमीन मुस्लिम आप्रवासियों को देनी पड़ी और हजारों बौद्धों को अब वहां से पलायन करना पड़ रहा है।

यही सब कारण है कि बौद्ध भिक्षु उन्हें देश से चले जाने की धमकियां देते हैं। भिक्षु मानते हैं कि ये हमारे देश और धर्म के लिए खतरा हैं। इसी के चलते 1995 से मुसलमानों के खिलाफ बाकायदा योजनाबद्ध हमले बढ़े हैं और रह रह कर उन्हें जमीन और जिंदगी से बेदखल किया जाता रहा है। ठीक उसी तरह जिस तरह की कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को किया गया।
रोहिंग्या मुस्लिम प्रमुख रूप से म्यांमार (बर्मा) के अराकान (जिसे राखिन के नाम से भी जाना जाता है) प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम लोग हैं जो सुन्नी इस्लाम को मानते हैं। म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम बेघर हो चुके हैं। कुछ हजार मुसलमानों ने भारत में शरण ले रखी है जबकि बांग्लादेश जैसे मुसलिम देशों ने इन मुसलमानों को शरण देने से इनकार कर दिया है।
रहाइन स्टेट में ही धार्मिक हिंसा के शिकार रोहिंग्या मुसलमानों को कैंप में शिफ्ट किया गया है। इसकी प्रतिक्रिया में भारत के बोधगया में बम विस्फोट किए गए जिसके चलते बौद्ध और भड़क गए।
रोहिंग्या मुसलमानों को मुश्किल उस वक्त और बढ़ गई जब पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिस सईद ने उन्हें आतंकवादी संगठन में शामिल करने की बात कही। सबसे बड़ी समस्या रोहिंग्या विस्थापितों के इस्लामी हमदर्दों की है, जो पाकिस्तान के अपने सुरक्षित अड्डों में बैठकर उनकी दुर्दशा को 'इस्लाम-विरोधी अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र' की तरह पेश करते हैं।
बांग्लादेश में हाल ही में चटगांव के करीब दक्षिण पूर्व के शहर में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने 11 बौद्ध मंदिरों को जला डाला और दो अन्य को क्षतिग्रस्त कर दिया। हजारों की संख्या में मुस्लिम सड़कों पर उतर आए और मंदिरों और पड़ोस के बौद्ध इलाकों पर हमला कर दिया। इसके कारण स्थानीय बौद्ध अल्पसंख्यक अपने घरो में छिप गए लेकिन कोई सुरक्षा नहीं होने के कारण कम से कम 30 बौद्ध घरों में लूटपाट की गई।

