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बौद्ध राष्ट्रों में आतंकवाद के बढ़ते खतरे...

Last Updated: Saturday, 29 October 2016 (14:42 IST)
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एक समय था जबकि संपूर्ण एशिया में नेतृत्व और सत्ता के शिखर पर था। लेकिन इस्ला‍म के उदय के बाद छठी शताब्दी के अंत और आठवीं शताब्दी की शुरुआत तक बौद्ध धर्म दक्षिण एशिया के बहुत से राष्ट्र खो बैठा। इसमें आधा भारत भी शामिल है। वर्तमान में चीन, जापान, श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड, लागोस, भूटान, कोरिया, वियतनाम, ताइवान, मंगोलिया, कंबोडिया, जावा आदि बौद्ध राष्ट्र हैं।
जब से पश्चिम और मध्य एशिया में ने अपना विभत्स रूप दिखाना शुरू किया है तब से बौद्ध राष्ट्रों में इसको लेकर चिंता अपने चरम पर है। यही वजह है कि बौद्ध राष्ट्रों में मुस्लिमों के प्रति आक्रमक रुख भी वहां की सरकारों के ‍‍लिए मुसिबतें पैदा कर रहा है।

दुनियाभर में जहां भी मुसलमान गैर-इस्लामिक देशों में रह रहे हैं वहां अब उनको देखे जाने की दृष्टि बदल गई है, खासकर बौद्ध राष्ट्रों में। हालांकि स्थानीय मुसलमानों के लिए भी यह चिंता का विषय है कि बाहरी आतंकवादी गतिविधियों का असर उनके जीवन पर भी पड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बौद्ध राष्ट्रों में हुई आतंकवादी घटनाओं ने तो इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसके चलते बौद्धों में भी चरमपंथी संगठन अस्तित्व में आने लगे हैं।

पहले बौद्ध भिक्षु इस्ला‍म को खतराक नहीं मानते थे लेकिन कुछ जानकार कहते हैं कि अफगानिस्तान में बामियान की ऐतिहासिक प्रतिमाओं पर तालिबानी हमलों ने कुछ बौद्ध संप्रदायों को भड़काया और उनकी मुस्लिमों के प्रति देखने की दृष्टि बदल दी। इसके चलते ही बर्मा, श्रीलंका और में हालात बदल गए हैं।
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