4 बोली और भाषा - भारत के इस छोर से उस छोर तक, हर प्रदेश और क्षेत्र में संस्कृति की विभिन्नताओं को साफ तौर पर देखा जा सकता है और क्षेत्र के अनुसार ही अलग-अलग भाषा और बोलियों का प्रयोग इस देश को अनोखी मधुर खनक देता है। हिन्दी, मराठी, गुजराती, बंगाली, उड़िया, आसामी, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मद्रासी जैसी समृद्ध भाषाओं के अलावा प्रत्येक प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में की अपनी बोलियां हैं,जिनके अपने मायने हैं, भाव हैं और अपनेपन का स्वाद है। ऐसा लगता है जैसे ये देश एक चुनरी है और विभिन्न भाषाएं और बोलियां इस पर की गई कारीगरी...अपने-अपने तरीके की, आकर्षक और खूबसूरत।

5 रिश्तों का महत्व - ऐसा नहीं है कि अन्य देशों में रिश्तों को महत्व नहीं दिया जाता, लेकिन भारत इस मामले में विशिष्टता रखता है। संयुक्त परिवार, मर्यादा, सम्मान, अपनत्व, स्नेह, त्याग और आत्मीयता के विभिन्न रंग तो यहीं देखने को मिलते हैं, हर रिश्ते को संजोया जो जाता है यहां। यहां हर रिश्ता अनमोल है और हर बंधन एक उत्सव जिसे सिर्फ निभाया ही नहीं बल्कि जिया भी जाता है। कहीं देखा है रिश्तों के प्रति ऐसा समर्पण भाव।

