व्यापक रूप से पतंजलि औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं। पतंजलि के योग, बुद्धि नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है, जिसे राजयोग के रूप में जाना जाता है। पतंजलि के अनुसार योग के 8 सूत्र बताए गए हैं, जो निम्न प्रकार से हैं -
1 यम - इसके अंतर्गत सत्य बोलना, अहिंसा, लोभ न करना, विषयासक्ति न होना और स्वार्थी न होना शामिल है।
2 नियम - इसके अंतर्गत पवित्रता, संतुष्टि, तपस्या, अध्ययन, और ईश्वर को आत्मसमर्पण शामिल हैं।
3 आसन - इसमें बैठने का आसन महत्वपूर्ण है
4 प्राणायाम - सांस को लेना, छोड़ना और स्थगित रखना इसमें अहम है।
5 प्रत्याहार - बाहरी वस्तुओं से, भावना अंगों से प्रत्याहार।
6 धारणा - इसमें एकाग्रता अर्था एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना महत्वपूर्ण है।
7 ध्यान - ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन इसमें शामिल है।
8 समाधि - इसमें ध्यान की वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना शामिल है। इसके दो प्रकार हैं - सविकल्प और अविकल्प। अविकल्प में संसार में वापस आने का कोई मार्ग नहीं होता। अत: यह योग पद्धति की चरम अवस्था है।
भगवद गीता में योग के जो तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं वे हैं -
1 कर्मयोग - इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है।
2 भक्ति योग - इसमें भगवत कीर्तन प्रमुख है। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है।
3 ज्ञाना योग - इसमें ज्ञान प्राप्त करना अर्थात ज्ञानार्जन करना शामिल है।

