webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia

कहां और कैसा है पाताल लोक, जानिए

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
Widgets Magazine
जल के भीतर अग्नि : माना जाता है कि जब देवताओं ने दैत्यों का नाश कर अमृतपान किया था तब उन्होंने अमृत पीकर उसका अवशिष्ट भाग पाताल में ही रख दिया था अत: तभी से वहां जल का आहार करने वाली आसुर अग्नि सदा उद्दीप्त रहती है। वह अग्नि अपने को देवताओं से नियंत्रित रहती है और वह अग्नि अपने स्थान के आस-पास नहीं फैलती।

इसी कारण धरती के अंदर अग्नि है अर्थात अमृतमय सोम (जल) की हानि और वृद्धि निरंतर दिखाई पड़ती है। सूर्य की किरणों से मृतप्राय पाताल निवासी चन्द्रमा की अमृतमयी किरणों से पुन: जी उठते हैं।

आगे पढ़े, धरती के किस स्थान से जा सकते हैं पाताल लोक....

Read more on : पाताल लोक त्रैलोक्य हिन्दू धर्म Hinduism Trilokya Patal Lok