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कहां और कैसा है पाताल लोक, जानिए

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
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हिंदू इतिहास ग्रंथ पुराणों में का वर्णन मिलता है। ये तीन लोक हैं- (1) कृतक त्रैलोक्य (2) महर्लोक, (3) अकृतक त्रैलोक्य।
 
(1) कृतक त्रैलोक्य- कृतक त्रैलोक्य जिसे त्रिभुवन भी कहते हैं। इसके बारे में पुराणों की धारणा है कि यह नश्वर है, कृष्ण इसे परिवर्तनशील मानते हैं। इसकी एक निश्‍चित आयु है। उक्त त्रैलोक्य के भी तीन भेद हैं- भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक (स्वर्ग)।
 
A. भूलोक : जितनी दूर तक सूर्य, चंद्रमा आदि का प्रकाश जाता है, वह पृथ्वी लोक कहलाता है। हमारी पृथ्वी सहित और भी कई पृथ्वियां हैं।
 
B. भुवर्लोक : पृथ्वी और सूर्य के बीच के स्थान को भुवर्लोक कहते हैं। इसमें सभी ग्रह-नक्षत्रों का मंडल है।
 
C. स्वर्लोक : सूर्य और ध्रुव के बीच जो चौदह लाख योजन का अंतर है, उसे स्वर्लोक या स्वर्गलोक कहते हैं। इसी के बीच में सप्तर्षि का मंडल है।
 
 
हम यहां बात कर रहे हैं- भूलोक में स्थित की। आगे पढ़ें....

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