बाल कविता : महाराजा के घर
Published: Tue, 10 Mar 2026 (10:40 IST)
Updated: Tue, 10 Mar 2026 (10:49 IST)
खिड़की में से भीतर आया।
बोला उठो-उठो अब जल्दी,
क्यों सोए अब तक महाराजा।
मैं बोला मैं महाराजा हूं,
तो तुम खिड़की से क्यों आए,
चौकीदार खड़ा द्वारे पर,
उसे बताकर क्यों न आएं?
आ गए हो चौका बर्तन,
झाड़ू-पोंछा करके जाना।
आगे से महाराजा के घर,
बिना इजाजत कभी न आना।