सूरज से किरणे उतरी हैं, बैठ धूप के घोड़ों पर। नजर लगी है शीला के घर, बनते गरम पकोड़ों पर। घोड़ों सहित रसोई की वे, खिड़की से भीतर आईं। गरम चाय से भरी केतली, देख-देख कर मुस्काईं। गरम चाय के साथ पकोड़ों, का आनंद उठाएंगी। किरणे बता गईं...