
5. बृहस्पति के दोष दूर करने के लिए हरिद्रा मिश्रित दुग्ध से अभिषेक करें तथा पुष्प चढ़ाएं।
6. शुक्र संबंधी बाधा दूर करने के लिए पंचामृत से अभिषेक करें तथा श्वेत पुष्प चढ़ाएं।
7. शनि की पीड़ा दूर करने के लिए गन्ने के रस से अभिषेक करें तथा नीले पुष्प चढ़ाएं।
8. राहु-केतु की शांति के लिए भांग-मिश्रित जल या दुग्ध से अभिषेक तथा धतूरा चढ़ाएं।
इसी प्रकार वित्तवृद्धि के लिए शहद, शत्रु शांति के लिए सरसों के तेल, व्याधि नाश के लिए गौ-दुग्ध से बने छाछ, सुख-समृद्धि के लिए गौ-दुग्ध, ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए गन्ने के रस तथा शांति के लिए तीर्थ जल से अभिषेक कर सकते हैं।
पूर्ण लाभ लेने के लिए पूरे मास पूजन करें, यथाशक्ति जप करें, अनुष्ठान के नियमों का पालन करें। यदि संभव हो तो विद्वान ब्राह्मण द्वारा पूजन कराएं। कम से कम सोमवार को जरूर करवाएं।

