शाम्भवी मुद्रा : आंखें खुली हों, लेकिन आप देख नहीं सकते। ऐसी स्थिति जब सध जाती है तो उसे शाम्भवी मुद्रा कहते हैं। ऐसी स्थिति में आप नींद का मजा भी ले सकते हैं। यह बहुत कठिन साधना नहीं है, लेकिन सरल भी नहीं है। इसके ठीक उल्टा कि जब आंखें बंद हो तब आप देख सकते हैं यह भी बहुत कठिन साधना है, लेकिन यह दोनों ही संभव है। असंभव कुछ भी नहीं। बहुत से ऐसे पशु और पक्षी हैं जो आंखे खोलकर ही सोते हैं।

विधि- यदि आपने त्राटक किया है या आप त्राटक के बारे में जानते हैं तो आप इस मुद्रा को कर सकते हैं। सर्वप्रथम सिद्धासन में बैठकर रीढ़-गर्दन सीधी रखते हुए पलकों को बिना झपकाएं देखते रहें, लेकिन ध्यान किसी भी चीज को देखने पर ना रखें। दिमाग बिल्कुल भीतर कहीं लगा हो। जैसे कुछ व्यक्तियों को आपने धुन में देखा होगा या कहे कि वे खयालों में इतने रहते हैं कि उन्हें आसपास का खयाल ही नहीं रहता। बस कुछ इसी तरह की यह विधि है।
सलाह- शाम्भवी मुद्रा पूरी तरह से तभी सिद्ध हो सकती है जब आपकी आंखें खुली हों, पर वे किसी भी चीज को न देख रही हो। ऐसा समझें की आप किसी धून में जी रहे हों। आपको खयाल होगा कि कभी-कभी आप कहीं भी देख रहें होते हैं, लेकिन आपका ध्यान कहीं ओर रहता है।
अवधि- इस मुद्रा को शुरुआत में जितनी देर हो सके करें और बाद में धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते जाएं।
लाभ- शाम्भव मुद्रा को करने से दिल और दिमाग को शांति मिलती है। योगी का ध्यान दिल में स्थिर होने लगता है। आंखें खुली रखकर भी व्यक्ति नींद और ध्यान का आनंद ले सकता है। इसके सधने से व्यक्ति भूत और भविष्य का ज्ञाता बन सकता है।

