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स्त्री सुरक्षा, सम्मान व समानता के लिए बेटों को "मेल ईगो" से बचाएं

11. हर रिश्ते को गरिमा शालीनता व सभ्यता से बनाने की सीख दे।
12. प्रेम स्नेह व अपनत्व भाव से घर की जिम्मेदारियों को उठाना सिखाए। एहसान भाव न प्रदर्शित होने दे।
13. ससुराल पक्ष के रिश्तों की भी एहमियत समझाए व वहां केवल आदर आतिथ्य की अपेक्षा रखने की बजाए कर्तव्यपूर्ति के भाव विकसित करें।
14. किसी भी स्थिति में स्त्री को शब्दों या क्रियाकलापों से आहत या अपमानित न करें न ही उस पर छींटाकशी वस्त्रों या चरित्र को लेकर करने दे।
15. स्त्री को मात्र शरीर समझ उसका मजाक बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाए।
 
स्त्रियों का परम कर्तव्य है कि अपने भाई, पुत्र, पति या पिता द्वारा किसी स्त्री के प्रति अनुचित व्यवहार या वाणी प्रयोग प्रतीत होते ही विरोध करे। तमाम संस्कारों के बाद भी यदि किसी निकट संबंधी द्वारा पाशविक वृत्ति का अपराध किए जाने की भनक भी मिले तो उसे सजा दिलवाने में मददगार बने।
 
"मेल ईगो" जैसी पुरूषों की घृणास्पद पाशविक वृत्ति से ही समाज में स्त्री असुरक्षा की भावना से ग्रसित हो हर कदम पर डरती है। इससे ही अपराध जन्म लेते हैं व परिवार व समाज की जो क्षति होती है वह अपूरणीय है। अतः बेटियों को अन्याय न सहने की, दृढ़ रहने की शिक्षा देना व बेटों को स्त्री व समानता के देने से ही समाज की मर्यादा कायम रह सकती है। बेटों को सुधारें तो बेटियां स्वयं ही सुरक्षित होंगी। बेटों को संस्कार देंगे तो सोच विकसित होगी वहीं समाज में बदलाव लाएगी। यह बीड़ा उठाना हर मां का कर्तव्य है।
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