॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
॥ यज्ञौवैश्रेष्ठतरं कर्मः स यज्ञः स विष्णुः॥
॥ यज्ञात्भवति पर्जन्यः पर्जन्याद्अन्नसम्भवः॥
॥ सत्यं परम धीमहि, धरम न दूसर सत्य समाना आगम निगम पुराण बखाना।।
बारह साल में बार होने वाला सिंहस्थ ईश्वर के दर्शन, पूजन, स्नान और यज्ञ आहुतियों के लिए भी विशेष समय माना जाता है। सिंहस्थ में हर तरफ यज्ञ आयोजित हो रहे हैं। आइए जानते हैं कि यज्ञ के कुंडों की क्या महत्ता है....
नौ कुंडीय लक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी बहुत ही फलदाई माना जाता है। इस यज्ञ के दौरान प्रातःकाल से ही वेद ऋचाओं व श्रीसूक्त पाठ का वाचन करने से आसपास का बाहरी वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है।

