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  4. Poetry on Iran US war

महायुद्ध पर कविता: सुलग रहा संसार है

 Iran US war
सुलग रहा संसार क्यों अब 
और छाया हा हकार है
पल में बदलेगी किसकी दुनिया  
इसका ना कोई ऐतबार है 
 
हो रही रक्त रंजित धरा 
आसमां पर धुएं का गुब्बार है 
 
अंत हीन है युद्ध बिगुल ये 
चीर कानों को भरता मन में भय,
अशांति का विश्व में साम्राज्य है 
 
कुछ की ज़िद और कुछ की अकड़न 
कर रही मानवता पर कुठाराघात है 
एक इंसा करें शुरू युद्ध बिगुल पर 
इससे पिसता सब संसार है 
 
दृश्य करून देख देख कर 
मन मेरा करे ये सवाल है 
क्या शांति से निकल नहीं सकता?
किसी भी समस्या का समाधान है 
 
महाभारत होते कान्हा ना रोक पाए 
ऐसा ही लंका युद्ध का भी इतिहास है 
दानव बन जाता जब मानव 
तब तब लिखा गया ऐसा ही इतिहास है 
 
चलो मित्रों परम पिता परमात्मा से करें गुहार हम  
थम जाए ये बर्बादी का आलम   
और हो विश्व में चैन और अमन 
जी सके हर कोई शांति से जो सबका अधिकार है। 

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