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पाकिस्तान से युद्ध क्यों है जरूरी, जानिए 5 चौंकाने वाले कारण

Pahalgam Terrorist Attack
pahalgam attack: क्या पाकिस्तान से युद्ध करना चाहिए? इस सवाल का जवाब आप 100 लोगों से पूछिए। इनमें से 60 से 70 लोग कहेंगे कि अबकी बार आरपार। अब जो बच गए लोग हैं वे क्या कहेंगे? संभवत: उनमें से कुछ कहें पाकिस्तान का आर्थिक रूप से बहिष्कार करो, सिंधु जल संधि तोड़ो, राजनयिक रिश्‍ते खत्म करो,  या कहेंगे कि युद्ध से ज्यादा जरूरी है विकास। इसमें से कुछ ऐसे भी हैं जो कहेंगे कि पाकिस्तान से युद्ध लड़ने से ज्यादा जरूरी है कि देश के गद्दारों का खात्मा करो।ALSO READ: क्या भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने वाला है, क्या कहते हैं ग्रह नक्षत्र
 
कुछ कहेंगे कि जज्बाती या भावना में बहने की जरूरत नहीं है। धैर्य से काम लेना चाहिए। उन्होंने मुंबई में हजारों लोग मार दिए तब भी यही कहा जा रहा था कि जज्बाती मत होना, उन्होंने 26/11 किया तब भी यही कहा गया कि जज्बाती मत होना, उन्होंने अक्षरधाम पर हमला करके भक्तों को मार दिया तब भी यही कहा था कि जज्बाती मत होना। उन्होंने 1990 के दशक में कश्मीर में नरसंहार किया तब भी बस कड़ी निंदा करके चुप रह गए। उन्होंने उरी में अटैक किया और उन्होंने पुलवामा में अटैक किया और अब पहलगाम में अटैक किया तब भी आप कह रहे हैं कि जज्बात और भावना में बहकर कोई निर्णय नहीं लेना है।ALSO READ: Pahalgam attack : एयरस्ट्राइक के खौफ में पाकिस्तान, PoK में खाली कराए टेरर ट्रेनिंग कैंप, क्या है भारत की रणनीति
 
पाकिस्तान से युद्ध क्यों है जरूरी?
1. आतंकवादी नहीं पाक सेना है शत्रु: जब तक पाकिस्तान की सेना है तब तक आतंकवाद जारी रहेगा। असली दुश्मन हाफिज सईद, सलाउद्दीन, मसूद अजहर नहीं बिल्क इनके जैसे आतंकवादियों को पैदा करने वाली पाकिस्तान की सेना है। ये आतंकवाद तब तक जारी रहेगा जब तक की आप पाकिस्तान की सेना को सबक नहीं सिखाते हैं। ये आपके घर में घुसकर आपके निर्दोष नागरिकों की हत्या करेंगे, आप उरी या बालाकोट स्ट्राइक करके इनके 300 मार देंगे तो ये फिर से घुसकर आपके 100 मार देंगे। यह सिलसिला चलता रहेगा। ये रुकने वाले नहीं हैं। इन्हें किसी प्रकार का डर या खौफ नहीं। जब तक पाकिस्तानी फौजियों की लाशें ताबूत में रखकर उनके घर नहीं भेजोगे, यह चलता रहेगा।
 
2. क्या सिर्फ परेड के लिए है भारतीय फौज? भारत के पास 15 लाख से ऊपर है आर्मी, नेवी और एयरफोर्स। बिलियंस ऑफ डॉलर का बजट है। क्या इंडियन आर्मी रिपब्लिक डे पर परेड करने के लिए है, किसी दूसरे देश में शांति स्थापित करने के लिए है या सिर्फ रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए है? क्या यह फौज अपने खुद के फौजियों को और देश के निर्दोष लोगों को यूंही शहीद होते हुए देखती रहेगी? हमारी सेना ने कारगिल करके ही हमारी कई पहाड़ियों को मुक्त कराकर एक बहुत बड़ा भू भाग फिर से भारत में मिलाया था। यदि अटल बिहारी बाजपेयी डर जाते  तो क्या होता? हमारी सेना में वह ताकत है कि वह मात्र 15 से 30 दिनों के भीतर पीओके को मुक्त करा सकती है। इसलिए उन्हें आगे बढ़े का मौके दें।
 
3. युद्ध से ही निकलेगा हल: सचमुच ही युद्ध किसी समस्या का हल नहीं, लेकिन यदि बातचीत ही समस्या का हल होती तो राम-रावण का युद्ध नहीं होता और महाभारत का युद्ध भी नहीं होता। मैं यहां युद्ध का पक्ष नहीं ले रहा बल्कि यह बता रहा हूं कि इतिहास क्या कहता है। युद्ध ने ही इतिहास को बदला है। भारत हमेशा ही युद्ध से बचता रहा है और जब उस पर युद्ध थोपा गया तो वह नैतिक युद्ध के पक्ष में रहा है। यही सहिष्णुता और नैतिकता हमारे अस्तित्व को धीरे धीरे खत्म कर रही है। हमें इजराइल से सीखने की जरूरत है। यदि युद्ध थोपा जा रहा है तो पीछे हटना कायरता है।

भारत ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया। आक्रमणकारी आए और नैतिकता को ताक में रखकर वो हमारे लोगों को बेरहमी से कुचल और लूट कर निकल गए। उन्होंने औरतों, बच्चों और संतों को भी नहीं छोड़ा। इतिहास को पढ़िये। हम युद्ध करने के लिए कभी बाहर नहीं गए, इसलिए हमारी ही धरती को रक्त से लाल किया जाता रहा। जरा बाहर निकलो।
 
4. छोड़ने का परिणाम: पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को कितनी बार छोड़ा, यह शायद सभी जानते होंगे। इंदिरा गांधी ने भी पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को छोड़कर हमारे सैनिकों का बलिदान व्यर्थ कर दिया था। इससे पहले 1965 में हमारी सेना लाहौर तक चली गई थी। क्यों नहीं लाहौर पर कब्जा बरकरार रखा? लेकिन हम नैतिक लोग हैं। पाकिस्तानी सेना ने 1947 में कबाइलियों के साथ मिलकर कश्मीर के एक बहुत बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था जो अभी तक बरकरार है। उसने कभी किसी को नहीं छोड़ा। आपको याद होगा कि कश्मीर की जेल से जिन आतंकवादियों को छोड़ा किया था उन्होंने ही जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे खतरनाक आतंकवादी संगठन खड़े किए हैं। 
 
5. परिणाम की चिंता छोड़: परिणाम की चिंता वे करते हैं जो वीर नहीं होते हैं। वे युद्ध के खिलाफ कई तरह के तर्को को प्रस्तुत करते हैं। वे अहिंसा के मार्ग से सभी कुछ हासिल करने की बात करते हैं, लेकिन जिसने महाभारत और गीता पढ़ी है वे जानते हैं कि यदि राक्षस प्रवृत्ति के लोगों को नहीं मारकर यदि आप परिणाम की चिंता कर रहे हैं तो फिर यह तय मानिए कि सामने वाला आपका अस्तित्व मिटाने का संकल्प लेकर ही बैठा है आप मारे या न मारे वह तो आपको मारता ही जाएगा। आप चाहे कितनी ही प्रेम या अहिंसा की बातें करें। सच तो यह है कि आपकी अहिंसा कायरों की अहिंसा है भगवान महावीर स्वामी जैसे वीरों की नहीं। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि हे पार्थ यदि तू इन्हें नहीं मारेगा तो ये तो तुझे मरने के लिए ही उतावले होते जा रहे हैं। यह तूझे किसी भी हालत में छोड़ने वाले नहीं है। यदि तू इनसे नहीं लड़ेगा तो इतिहास में तुझे कायर समझा जाएगा।
 
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