आलू की चड्डी ढीली थी, कुर्ता ढीला बैंगन का। दोनों ही नाराज बहुत थे, हुआ न कुछ उनके मन का। कहा मटर ने अरे मूर्खों, आपस में बदलो कपड़े। ढीले-ढाले कपड़े पहने, व्यर्थ रो रहे पड़े-पड़े। अदला-बदली से दोनों को, सच में मजा बहुत आया। बैंगन को...