चटपटी बाल कविता : जंगल की होली
Published: Tue, 10 Mar 2026 (10:40 IST)
Updated: Tue, 10 Mar 2026 (10:49 IST)
शेर भाई ने हाथी जी के,
माथे में था तिलक लगाया।
हाथी ने भी सूंड उठाकर,
ढेरम ढेर ग़ुलाल उड़ाया।
तभी हाथ में ले पिचकारी,
एक गिलहरी थी आ धमकी।
बंदर ढ़ोल बजता आया।
कौआ लगा बजाने टिमकी।
सबने होली खूब मनाई,
हो हल्ला था खूब मचाया।
एक लोमड़ी ने सबको ही,
हलवा गरमागरम खिलाया।
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