webdunia
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. hindi poem on basant ritu

कविता : मधुमास

मधुमास
है आसपास,
स्वप्निल गुंजित मधुमास।
 
तुंग हिमालय के स्वर्णाभ शिखर,
अरुणिम आभा चहुंओर बिखर।
 
नव्य जीवन का रजत प्रसार,
मधुकर-सा गुंजित अपार।
 
सुरभित मलयज मंद पवन,
नील निर्मल शुभ्र गगन।
 
मृदु अधरों पर मधु आमंत्रण,
नयनों का है नेह निमंत्रण।
 
बासंती सोलह सिंगार,
सतरंगी फूलों की बहार।
 
पीत पुष्प आखर से,
उपवन हैं बाखर से।
 
शतदल खिली कमलिनी,
गंधित रसवंती कामिनी।
 
कंपित अधरों का मकरंद,
किसलय कंपित मन के छंद।
 
मंजरियों में बौराई आमों की गंध,
अभिसारी गीतों में प्रेम के आबंध। 

( ! ) Warning: Unknown: Write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

( ! ) Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0