लाल रंग
लाल रंग मनुष्य के शरीर को स्वस्थ और मन को हर्षित करने वाला है। इससे शरीर का स्वास्थ्य सुधरता और मन प्रसन्न रहता है। यह पौरूष और आत्मगौरव प्रगट करता है। लाल टीका शौर्य एवं विजय का प्रतीक है। प्राय: सभी देवी-देवताओं की प्रतिमा पर लाल रोली का टीका लगाया जाता है।
हिन्दू धर्म में लाल रंग से उन्हीं देवी-देवताओं को सुसज्जित किया गया है, जो परम मंगलकारी, धन, तेज, शौर्य और पराक्रम को प्रगट करते हैं। उन देवताओं को शौर्यसूचक लाल रंग दिया गया है जिन्होंने अपने बाहुबल, अस्त्र-शस्त्र तथा शारीरिक शक्तियों से दुष्ट दैत्यों या आसुरी प्रवृत्तियों को परास्त किया है।
हर्ष, खुशी के अवसर पर लाल रंग से ही स्पष्ट किए जाते हैं। विवाह, जन्म, विभिन्न उत्सवों पर आनंद की भावना लाल रंग से प्रगट होती है। नारी की मांग में लाल सिन्दूर जहां उसका सौंदर्य बढ़ाता है वहीं अटल सौभाग्य तथा पति प्रेम भी प्रगट करता है।
हिन्दू धर्म में लाल रंग से उन्हीं देवी-देवताओं को सुसज्जित किया गया है, जो परम मंगलकारी, धन, तेज, शौर्य और पराक्रम को प्रगट करते हैं। उन देवताओं को शौर्यसूचक लाल रंग दिया गया है जिन्होंने अपने बाहुबल, अस्त्र-शस्त्र तथा शारीरिक शक्तियों से दुष्ट दैत्यों या आसुरी प्रवृत्तियों को परास्त किया है।
हर्ष, खुशी के अवसर पर लाल रंग से ही स्पष्ट किए जाते हैं। विवाह, जन्म, विभिन्न उत्सवों पर आनंद की भावना लाल रंग से प्रगट होती है। नारी की मांग में लाल सिन्दूर जहां उसका सौंदर्य बढ़ाता है वहीं अटल सौभाग्य तथा पति प्रेम भी प्रगट करता है।
हिन्दू तत्वदर्शियों ने सिंह वाहिनी भगवती दुर्गा को लाल रंग के वस्त्रों से सुसज्जित किया है। उनकी पूजा से आध्यात्मिक, दैहिक तथा भौतिक त्रितापों को दूर करने का विधान है। धन की देवी लक्ष्मीजी को भी मंगलकारी लाल वस्त्र पहनाए जाते हैं। लाल रंग धन, विपुल संपत्ति, समृद्धि और शुभ-लाभ को प्रकट करने वाला है।

