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महाकाल की नगरी उज्जैन में 01 से 12 मार्च तक चलेगा विक्रम उत्सव

vikramutsav 2024
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Vikramotsav 2024 Ujjain। महाकाल की नगरी उज्जैन में 1 मार्च से 12 मार्च 2024 तक सम्राट विक्रमादित्य की याद में विक्रमोत्सव का प्रारंभ हो रहा है। इस विक्रम उत्सव में जहां सम्राट विक्रमादित्य के इतिहास पर परिचर्चा होगी वहीं कई तरह के रंगारंग एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। विक्रमोत्सव 2024 के दौरान उज्जैन में क्षिप्रा के तट पर सूर्य उपासना और महाकाल शिव ज्योति अर्पणम के तहत 25 लाख दीप प्रज्जवलित किए जाएंगे।
 
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक मार्च को विक्रमोत्सव 2024 के भव्य आयोजन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस बाबत अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समारोह की पूरी रूप रेखा शेयर की और उज्जैन में स्थापित होने वाली वैदिक घड़ी के महत्व को भी बताया।
 
1 मार्च से 9 अप्रैल तक कई कार्यक्रम होंगे आयोजित : उज्जैन में 1 मार्च से 9 अप्रैल तक कला, संस्कृति और भक्ति के रंगों की धूम देखने को मिलेगी। 18 मार्च से 9 अप्रैल तक कालीदास अकादमी में कथक नृत्य, तबला वादन, गीत, संगीत का भव्य आयोजन होगा। इस दौरान देश विदेश के लाखों लोग यहां आएंगे। करीब सवा महीने तक लोकसंगीत, लोक नृत्य से लेकर शास्त्रीय संगीत के अनेक समारोह आयोजित होंगे। उज्जैन में कई सांस्कृतिक सभागार हैं- मसलन कालिदास अकादमी परिसर,त्रिवेणी संग्रहालय, पॉलीटेक्निक ग्राउंड, विक्रम कीर्ति मंदिर, घंटा घर और क्षिप्रा तट, इन सभी स्थलों पर रंगारंग उत्सव देखने को मिलेंगे।
विक्रमोत्सव 2024: विक्रमोत्सव 2024 के दौरान पूरी उज्जैन नगरी की छटा देखते ही बनती है। यहां के सारे कला और संस्कृति के केंद्र इन दिनों विशेष तौर पर सजे धजे दिखाई देते हैं। विक्रमोत्सव 2024 के दौरान 1 से 9 मार्च तक अनादि पर्व का विशेष आयोजन होगा। इस दौरान पं. कन्हैया मित्तल के भजनों की प्रस्तुति होगी। 7 मार्च को प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी दुर्गा नृत्य नाटिका पेश करेंगीं। जबकि 10 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 11 से 17 मार्च तक यहां श्रीकृष्ण लीला, भक्ति गायन, डांडिया रास, बांसुरीवादन, शंखध्वनि के साथ ही क्लासिकल नृत्यों का आयोजन किया जाएगा। वहीं 18 मार्च को राष्ट्रीय विज्ञान समागम, महादेव शिल्प कला और पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होगा।
 
विक्रमादित्य पर परिचर्चा : विक्रमादित्य केंद्रित परिचर्चा 1 - 12 मार्च 2024, स्थान : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन
 
  • 1 मार्च 2024 : विक्रमादित्ययुगीन संस्कृति एवं पुरातत्त्व संयोजक डॉ. विश्वजीत सिंह परमार, डॉ. हेमन्त लोदवाल, डॉ. अंजना सिंह गौर
  • 2 मार्च 2024 : विक्रमादित्य सम्बन्धित लोकाख्यान संयोजक डॉ. शेलेन्द्र शर्मा
  • 4 मार्च 2024 : विक्रमादित्ययुगीन विज्ञान एवं तकनीकी संयोजक डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. अंजलि उपाध्याय 
  • 5 मार्च 2024 : विक्रमादित्य काल में ज्योतिष परम्परा का विकास, संयोजक डॉ. बी.के. आंजना, डॉ. सर्वेश्वर शर्मा
  • 6 मार्च 2024 : विक्रमादित्यकालीन आर्थिक स्थिति संयोजक डॉ. एस.के. मिश्र, डॉ. घर्मेन्द्र सिंह, डॉ. नेहा माथुर
  • 7 मार्च 2024 : विक्रमादित्ययुगीन कृषि व्यवस्थाएँ, संयोजक डॉ. राजेश टेलर
  • 8 मार्च 2024 : विक्रमादित्य की न्याय व्यवस्था संयोजक डॉ. तरूण मलिक, डॉ.तृप्ति जायसवाल
  • 9 मार्च 2024 : विक्रमादित्य काल में संस्कृत साहित्य का विकास संयोजक डॉ. बी.के. आंजना, डॉ. महेन्द्र पण्ड्या 
  • 11 मार्च 2024 : विक्रमादित्य काल में राजत्व, सिद्धान्त संयोजक डॉ. नलिन सिंह पंवार, डॉ. शिव कुमार कुशवाह
  • 12 मार्च 2024 : विक्रमादित्यकालीन पर्यावरण चिन्तन संयोजक डॉ. डी.एम. कुमावत, डॉ. मुकेश वाणी
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