webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia
  1. धर्म संसार
  2. धर्म दर्शन
  3. सिख धर्म
  4. Guru Har Rai Jayanti 2026

गुरु हर राय जयंती, जानें महान सिख धर्मगुरु के बारे में 5 खास बातें

सिख धर्म के सातवें गुरु, गुरु हर राय जी का फोटो
Guru Har Rai Ji Biography: सिखों के सातवें गुरु, गुरु हर राय जी की जयंती आज, 31 जनवरी 2026, माघ शुक्ल त्रयोदशी को मनाई जा रही है। इस अवसर पर पूरा देश और सिख समाज उन्हें नमन कर रहा है। गुरु हर राय जी अपनी कोमलता, आध्यात्मिक शांति और मानवता के प्रति प्रेम के लिए जाने जाते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धर्म वही है जो हर जीव के कल्याण की भावना से जुड़ा हो। उन्होंने न केवल सिख धर्म का प्रचार किया, बल्कि समाज सेवा के नए मापदंड भी स्थापित किए। 
 
  1. शांति और अहिंसा के पुजारी
  2. पहले 'आयुर्वेदिक डॉक्टर' और दवाखाना
  3. प्रकृति और पर्यावरण प्रेमी
  4. निष्पक्ष न्याय और सिद्धांत की दृढ़ता
  5. गुरुगद्दी का उत्तराधिकारी
 
गुरु हर राय जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं सिख धर्म के सातवें गुरु, श्री गुरु हर राय जी के जीवन से जुड़ी 5 खास बातें, जो आज भी इंसानियत, करुणा और प्रकृति-प्रेम की सीख देती हैं।
 

1. शांति और अहिंसा के पुजारी

गुरु हर राय जी के पास 2200 सशस्त्र घुड़सवारों की एक कुशल सेना थी, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने हमेशा अहिंसा का मार्ग चुना और सिखाया कि शक्ति का प्रदर्शन केवल रक्षा के लिए होना चाहिए, न कि आक्रमण के लिए।
 

2. पहले 'आयुर्वेदिक डॉक्टर' और दवाखाना

गुरु जी प्रकृति और आयुर्वेद के बहुत बड़े ज्ञाता थे। उन्होंने पंजाब के कीरतपुर साहिब में एक बहुत बड़ा दवाखाना (डिस्पेंसरी) खोला था। कहा जाता है कि जब मुगल बादशाह शाहजहां का पुत्र दारा शिकोह गंभीर रूप से बीमार हुआ और कहीं उसका इलाज नहीं मिला, तब गुरु हर राय जी ने अपने दवाखाने से दुर्लभ जड़ी-बूटियां भेजकर उसकी जान बचाई थी।
 

3. प्रकृति और पर्यावरण प्रेमी

गुरु हर राय जी को फूलों और पौधों से गहरा लगाव था। उन्होंने कीरतपुर साहिब में सुंदर बगीचे और पार्क बनवाए थे। वे सिखों के पहले ऐसे गुरु थे जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, इसलिए उनकी याद में 'सिख पर्यावरण दिवस' भी मनाया जाता है।
 

4. निष्पक्ष न्याय और सिद्धांत की दृढ़ता

जब औरंगजेब ने गुरु जी के बड़े पुत्र राम राय को दिल्ली बुलाया, तो राम राय ने औरंगजेब को खुश करने के लिए गुरुबाणी की पंक्तियों को बदल दिया। जब गुरु हर राय जी को यह पता चला, तो उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के कारण अपने पुत्र को त्याग दिया और उसे कभी दर्शन नहीं दिए। उन्होंने सिखाया कि धर्म और सत्य का स्थान परिवार से ऊपर है।
 

5. गुरुगद्दी का उत्तराधिकारी

गुरु हर राय जी ने अपने छोटे पुत्र हरकिशन जी (जो उस समय मात्र 5 वर्ष के थे) को उनकी आध्यात्मिक परिपक्वता को देखते हुए अपना उत्तराधिकारी चुना, जिन्हें हम आठवें गुरु 'गुरु हरकिशन साहिब जी' के रूप में जानते हैं।
 
सिख धर्म के सातवें गुरु, गुरु हरराय जी की जयंती पर शत् शत् नमन।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
 
ये भी पढ़ें
माघ पूर्णिमा का महत्व और पौराणिक कथा