webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia

रोचक कथा : भगवान जगन्नाथ को आता है बुखार, बदलते हैं करवट

Author पं. हेमन्त रिछारिया|
Widgets Magazine


(भाग-2)
 
ज्येष्ठ पूर्णिमा को को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। इस स्नान के बाद भगवान को ज्वर (बुखार) आ जाता है। 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को एकांत में एक विशेष कक्ष में रखा जाता है। जहां केवल उनके वैद्य और निजी सेवक ही उनके दर्शन कर सकते हैं। इसे 'अनवसर' कहा जाता है।

ALSO READ: रोचक कथा : श्री जगन्नाथ जी और कर्माबाई की खिचड़ी
 
इस दौरान भगवान जगन्नाथ को फलों के रस, औषधि एवं दलिया का भोग लगाया जाता है। भगवान स्वस्थ होने पर अपने भक्तों से मिलने रथ पर सवार होकर निकलते हैं जिसे जगप्रसिद्ध 'रथयात्रा' कहा जाता है। 'रथयात्रा' प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलती है। 
 
भगवान भी बदलते हैं करवट-
 
देवशयनी एकादशी से भगवान का शयन प्रारंभ हो जाता है जो देवोत्थान एकादशी तक जारी रहता है। इस अवधि को चातुर्मास भी कहा जाता है। इस बीच भगवान भाद्रपद शुक्ल एकादशी को अपनी करवट बदलते हैं। (क्रमश:)

ALSO READ: भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ, सिर्फ मिल सकेंगे वैद्य
 
-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com
Read more on : जगन्नाथ मन्दिर पुरी उड़ीसा भगवान को बुखार भगवान बदलते हैं करवट रथयात्रा भगवान जगन्नाथ Jagannath Puri Rath Yatra