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केंद्र के दबाव में ताजमहल गए हैं योगी : अखिलेश

Yogi Adityanath
लखनऊ। ताजमहल को लेकर पनपे विवाद के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होने के बाद केंद्र सरकार के दबाव में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मजबूरन बुधवार को विरासत स्थल जाना पड़ा।
 
अखिलेश ने कहा कि भाजपा के लोगों ने ताजमहल को शिव का मंदिर बता दिया। किसी ने उसे भारतीय संस्कृति पर धब्बा कहा। मगर देखिए समय कैसे बदलता है? जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई तो केंद्र सरकार के दबाव में मुख्यमंत्री योगी बुधवार को ताजमहल पहुंच गए।
 
सपा अध्यक्ष ने योगी द्वारा बुधवार को चलाए गए स्वच्छता अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग ताजमहल को अपनी संस्कृति का हिस्सा और अपनी धरोहर ही नहीं मानते थे, भगवान राम ने क्या किया कि बुधवार को उन्हें उसी इमारत के पश्चिमी द्वार पर झाडू लगानी पड़ गई। 
 
अखिलेश ने कहा कि ताजमहल परिसर में कुछ लोगों ने भगवा पहनकर पूजा की। ये लोग देश से पर्यटन को खत्म करना चाहते हैं। मैं चुनौती देता हूं कि भाजपा और उसके लोग ताजमहल को दुनिया की धरोहर इमारतों की सूची से हटवाकर दिखाएं। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने ताजमहल के आसपास सबसे ज्यादा काम किया, जबकि मौजूदा भाजपा सरकार ने इस इमारत से जुड़ी तमाम परियोजनाओं को रोक दिया।
 
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि इस बार गुजरात की जनता ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को खारिज करने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस से 5 सीटें मांगी हैं। अगर बात नहीं बनती है तो भी सपा वहां सभी सीटों पर कांग्रेस का समर्थन करेगी।
 
अखिलेश ने प्रदेश के आगामी स्थानीय निकाय चुनाव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि प्रदेश में कूड़े की बड़ी समस्या है और कूड़ा खत्म करने का चुनाव भी आ रहा है। हम जनता से कहेंगे कि कूड़े को सफाई में बदलने के लिए इन चुनाव में सपा को वोट दें। अगर सपा जनता को समझाने में कामयाब रही और मेट्रो रेल, जनेश्वर मिश्र पार्क, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को लेकर वोट पड़े तो ज्यादातर नगर निगमों में सपा के ही मेयर होंगे।
 
अखिलेश ने एक सवाल पर कहा कि उनकी पार्टी आगामी 8 नवंबर को नोटबंदी का 1 साल पूरा होने पर काला दिवस मनाएगी। इस मौके पर बसपा, भाजपा तथा कांग्रेस के कई नेता अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सपा में शामिल होंगे। इनमें बसपा से 3 बार विधान परिषद सदस्य रहे मनीष जायसवाल, वरिष्ठ नेता मधुसूदन शर्मा तथा रालोद की पूर्व विधायक मिथिलेश पाल प्रमुख हैं। (भाषा) 
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