webdunia
  1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. अन्य धर्म
  4. Bahai New Year

Bahai New Year 2021 : नवजीवन व नवचेतना का त्योहार 'नवरोज'

Bahai New Year 2021
Bahai New Year
 

- समीर शर्मा
 
* 20 मार्च को बहाई नव वर्ष पर विशेष
 
19 दिनों के कड़े उपवास के बाद 20 मार्च को नववर्ष मनाएंगे। दुनिया भर के बहाई धर्म के अनुयायी पूरे इतिहास के दौरान ईश्वर ने मानव जाति के पास ’दिव्य शिक्षकों’ की एक श्रृंखला भेजी है- जो ईश्वर के अवतारों के रूप में जाने जाते हैं, जिनकी शिक्षाओं ने सभ्यता के विकास के लिए आधारभूमि प्रदान की है।


इन अवतारों में शामिल हैं अब्राहम, कृष्ण, जरथुस्त्र, मूसा, बुद्ध, ईसा, मुहम्मद। इन अवतारों में नवीनतम हैं बहाउल्लाह, जिन्होंने कहा है कि दुनिया के सभी धर्म एक ही ‘स्रोत’ से आए हैं और सार रूप में ईश्वर की ओर से आए एक ही धर्म के क्रमबद्ध अध्याय हैं।
 
 
बहाईयों की मान्यता है कि मानवजाति के सामने जो सबसे बड़ी जरूरत आज है, वह है समाज के भविष्य को एकसूत्र में पिरोने वाली दृष्टि और जीवन के स्वरूप तथा उद्देश्य को जानने का। ऐसी ही दृष्टि बहाउल्लाह के लेखों में प्रकट होती है।
 
बहाई धर्म के अनुसार ईश्वर एक है और समस्त धर्म उसी एक ईश्वर द्वारा समय-समय पर अपने अवतारों यानी दैवीय शिक्षकों के माध्यम से युग की स्थिति और परिपक्वता के अनुसार भेजे जाते हैं! उन्होंने 1863 में अपने अवतार होने की घोषणा की और विश्व शांति, विश्व एकता हेतु धर्म, जाती, देश, भाषा से ऊपर उठकर एक होने का संदेश दिया। बहाई धर्मावलंबी उन्हें श्रीकृष्ण, ईसा मसीह, मुहम्मद, जरथुस्त्र और बुद्ध की कड़ी में इस युग का कल्कि अवतार मानते हैं। 
 
उपवास : प्रतिवर्ष 1 मार्च से 19 मार्च, लगातार 19 दिनों के उपवास से बाद 20 मार्च को बहाई नववर्ष मनाया जाता है। यह उपवास अन्य धर्मों की तरह ही आध्यात्मिक वृत्ति वाले होते हैं, इसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जल उपवास किया जाता है और सूर्यास्त के पश्चात् भोजन लिया जा सकता है। 
 
बहाई धर्म में आस्था रखने वाले विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग हैं और विश्व के सभी धर्मों और अवतारों के प्रति पूर्ण श्रद्धा और सम्मान रखते हैं। 
 
बहाई पंचांग : बहाई कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में 19 माह होते हैं और 19 दिनों का एक माह। 361 दिवस के अतिरिक्त प्रतिवर्ष 4 या 5 दिवस अधिदिवस होते हैं, जो उपवास की तैयारी के लिए होते हैं। आखिरी माह 19वां महीना होता है जिसमें उपवास रखे जाते हैं, इसका वास्तविक उद्देश्य तो यही है कि हम विषय वासनाओं से दूर अहंकार से मुक्त रहते हुए, प्रभु का स्मरण करें। बाहरी तौर-तरीकों से उभरकर उपवास रखें, अहम से दूर रहें तथा ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहें, द्वेष भावों से मुक्त हों, हर हाल में खुश रहें। सभी एकात्मकता की भावना से जुड़ें।
 
 
नवरोज : नव वर्ष के दिन बहाई अवकाश रखकर उत्सव मानते हैं, प्रार्थनाएं, संगीत, भोजन और धन्यवाद प्रेषित किए जाते हैं। 
 
बहाई धर्म के मुख्य सिद्धांत : बहाई धर्म के अनुयायी संपूर्ण विश्व के लगभग 180 देशों में समाज-नवनिर्माण के कार्यों में जुटे हुए हैं। बहाई धर्म में धर्मगुरु, पुजारी, मौलवी या पादरी वर्ग नहीं होता है। बहाई अनुयायी जाति, धर्म, भाषा, रंग, वर्ग आदि किसी भी पूर्वाग्रहों को नहीं मानते हैं।
 
 
इसके सिद्धांतों में प्रमुख हैं-
 
* ईश्वर एक है
* सभी धर्मों का स्रोत एक है
* विश्व शांति एवं विश्व एकता
* सभी के लिए न्याय
* स्त्री-पुरुष की समानता
* सभी के लिए अनिवार्य शिक्षा
* विज्ञान और धर्म का सामंजस्य
* गरीबी और धन की अति का समाधान
* भौतिक समस्याओं का आध्यात्मिक समाधान। 

-लेखक पत्रकार हैं और धर्म के अनुयायी हैं। 
ये भी पढ़ें
रसोईघर में किचन स्टैंड या प्लेटफार्म कैसा होना चाहिए, जानिए 5 वास्तु टिप्स

( ! ) Warning: Unknown: Write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

( ! ) Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0