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राम जन्मभूमि विवाद के हल का नया फॉर्मूला

Ayodhya controversy
नई दिल्ली। देश के कुछ बुद्धिजीवियों ने प्रस्ताव किया है कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर हिन्दुओं की आकांक्षाओं के अनुरूप भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ सरकार के अधीन 67 एकड़ की भूमि पर एक भव्य श्रीराम विश्वधर्मी मानवता भवन का निर्माण हो जो आतंकवाद, युद्ध और अशांति से ग्रस्त दुनिया को शांति का संदेश दे।
 
करीब 25 साल पुराने रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद के अदालत के बाहर परस्पर सम्मति कायम करने समाधान खोजने के उच्चतम न्यायालय के सुझाव के अनुरूप महाराष्ट्र के पुणे में स्थित एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो. डॉ. विश्वनाथ डी. कराड के नेतृत्व में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी, यहूदी आदि समुदायों के धर्मगुरू एवं विचारकों ने ये प्रस्ताव किया है।
 
इनमें रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े पूर्व सांसद एवं संत रामविलास वेदांती, पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एस एन पठान, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं परम सुपरकंप्यूटर के जनक पद्मभूषण डॉ. विजय पी भटकर, जम्मू कश्मीर विधान परिषद के उपसभापति जहांगीर हसन मीर आदि शामिल हैं।
 
राजधानी के कांस्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को आयोजित रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद मुद्दे का अंतरधर्म संवाद के माध्यम से सर्वमान्य समाधान विषय पर एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। डॉ. रामविलास वेदांती ने इस अवसर पर कहा कि आज समूची दुनिया हिंसा, आतंकवाद, उग्रवाद की विभीषिका से झुलस रही है। अमेरिका, उत्तर कोरिया, सीरिया आदि देशों में युद्ध की स्थितियां हैं, ऐसे में विश्व के सभी धर्मों को मानने वाले मिलकर विश्वशांति की स्थापना कर सकते हैं।
 
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने विश्व के सबसे बड़े आतंकवादी रावण का अंत करके विश्वशांति की स्थापना की थी और आज भी भगवान राम विश्वशांति की स्थापना की शक्ति रखते हैं। श्रीराम विश्वधर्मी मानवता भवन के माध्यम से सभी धर्मों को साथ लेकर यह काम संभव किया जा सकता है। 
 
प्रो. कराड ने कहा कि रामजन्मभूमि के बारे में विवाद 2.77 एकड़ भूमि के स्वामित्व का है जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीनों पक्षों- रामलला विराजमान, निर्माही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को 0.9-0.9 एकड़ भूमि दी है। इससे मंदिर का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर समूची 2.77 एकड़ भूमि पर श्रीराम का भव्य मंदिर हिन्दुओं की आकांक्षाओं के अनुरूप बने और उसी ज़मीन के समीप केन्द्र सरकार के अधीन 67 एकड़ भूमि को श्रीराम मंदिर परिसर से मिला कर एक श्रीराम विश्वधर्मी मानवता भवन बनाया जाए जिसमें सभी धर्मों के उपासनास्थल हों तो यह स्थान समूचे विश्व को शांति का अद्भुत संदेश देगा। धर्मों के टकराव के कारण पनपे आंतकवाद को खत्म करना संभव होगा।
 
प्रो. कराड ने कहा कि अयोध्या को इस प्रकार से सुपरस्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करके भगवान राम की नगरी अयोध्या विश्व की सबसे बड़ी सांस्कृतिक राजधानी बने। स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कहा था कि 21वीं सदी  भारत की होगी और भारत विश्व को ज्ञान देगा और विश्वगुरू बनेगा। उनकी यह भविष्यवाणी इसी रूप से सिद्ध होगी। (वार्ता)