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मध्यप्रदेश के महाकौशल अंचल में कमलनाथ और राकेश सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर

Madhya Pradesh Assembly elections
जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य के महाकौशल अंचल में इस बार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष राकेश सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। दोनों ही नेताओं के इस अंचल से आने के कारण कुल 38 सीटों पर जमकर जोरआजमाइश चल रही है।


महाकौशल अंचल के तहत आठ जिलों में कुल 38 विधानसभा सीटों में से वर्तमान में 25 पर भाजपा और 13 पर कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा ने अपनी सीटों को बढ़ाने के लिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं जबलपुर और छिंदवाड़ा में करवाईं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी जबलपुर और मंडला जिलों की यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा भाजपा और कांग्रेस के अन्य नेता भी इस अंचल में दर्जनों दौरे कर चुके हैं। इस अंचल से किसी भी दल की बढ़त राज्य में सत्ता की राह प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

कमलनाथ छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं, तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह जबलपुर से। वरिष्ठता व प्रभाव के आधार पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का कद बड़ा दिखता है, तो पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े भाजपा के पक्ष में हैं। महाकौशल क्षेत्र में जीत का परचम फहराने के लिए दोनों प्रयासरत हैं। इस क्षेत्र में सबसे अधिक आठ विधानसभा सीट जबलपुर में आती हैं।

आठ विधानसभा सीट में से 6 पर भाजपा तथा 2 पर कांग्रेस का कब्जा है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा की सात विधानसभा सीट में से चार पर भाजपा तथा 3 पर कांग्रेस का कब्जा है। बालाघाट की 6 विधानसभा सीट में से 3-3 सीट दोनों पार्टियों के पास हैं। नरसिंहपुर की चारों सीट पर भाजपा का कब्जा था। इसके अलावा कटनी की चार में से तीन सीट पर भाजपा तथा एक सीट पर कांग्रेस का कब्जा है।

सिवनी जिले की चार विधानसभा सीट में से दो-दो सीट पर कांग्रेस व भाजपा का कब्जा था। मंडला की तीन विधानसभा सीट में से दो पर भाजपा तथा एक पर कांग्रेस का परचम लहरा रहा है। डिंडौरी जिले की दो विधानसभा सीट में से एक-एक सीट पर कांग्रेस और भाजपा का कब्जा है। महाकौशल अंचल की 38 सीटों में हार-जीत के फैसले में आदिवासी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

खासतौर से ग्रामीण अंचलों में आदिवासी नेताओं का भी काफी प्रभाव है। इस अंचल में शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्री शरद जैन, संजय पाठक, गौरीशंकर बिसेन और ओमप्रकाश धुर्वे की प्रतिष्ठा दांव पर है। पूर्व मंत्री अजय विश्नोई और हरेंद्रजीत सिंह बब्बू भी इस बार फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन आठ सीटों के सभी प्रत्याशियों की किस्मत 28 नवंबर को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में कैद हो जाएगी। 11 दिसंबर को नतीजे आएंगे।
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