webdunia
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. मोटिवेशनल
  4. munshi premchand ke vichar

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार

premchand
मुंशी प्रेमचंद का हिन्दी साहित्य में विशेष स्थान है, आइए जानते हैं उनके विचार 
 
1. आत्मसम्मान की रक्षा हमारा सबसे पहला धर्म और अधिकार है।
 
2. सत्य की एक चिंगारी, असत्य के पहाड़ को भस्म कर सकती है।
 
3. अंधी प्रशंसा अपने पात्र को घमंडी और अंधी भक्ति धूर्त बनाती हैं।
 
4. अधिकार में स्वयं एक आनंद है, जो उपयोगिता की परवाह नहीं करता।
 
5. माँ की ‘ममता’ और पिता की ‘क्षमता’ का अंदाज़ा लगा पाना असंभव है।
 
6. सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रहते हैं।
 
7. जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं, उन्हें बार-बार सींचने की जरूरत नहीं होती।
 
8. प्रेम एक बीज है, जो एक बार जमकर फिर बड़ी मुश्किल से उखड़ता है।
 
9. न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसे चाहती है, नचाती है।
 
10. मन एक डरपोक शत्रु है जो हमेशा पीठ के पीछे से वार करता है।
प्रस्तुति : अनुभूति निगम 
ये भी पढ़ें
घी जरूर खाएं, नहीं करता है नुकसान, जानिए इसके बेमिसाल फायदे

( ! ) Warning: Unknown: Write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

( ! ) Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0