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मोटिवेशनल : दुनिया से बाद में लड़ें, पहले खुद से लड़कर हो जाएं खड़े

मोटिवेशनल
जब मन उदास हो, चारों तरफ से कोई अच्छी सकारात्मक सूचना न मिल रही हो तब कोई मोटिवेशनल बात अच्छी नहीं लगती पर यह मन का नजरिया है सच तो यह है कि उस समय हम सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं, चाहे तो छोटी सी चींटी से भी प्रेरणा ले सकते हैं और लेने वाला तो कूड़ा-करकट से भी अपने काम की बात ले ही लेता है। पर ऐसा तब होता है जब आपका मन नकारात्मकता से बाहर आना चाहता है, सकारात्मकता के पास जाना चाहता है। 
 
यानी कुल मिला कर सारी बातें मन की है। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत.... तो दोस्तों दुनिया से बाद में लड़ें पहले अपने आप से लड़कर हो जाएं खड़े....यह है अपने जीवन को बदलने का पहला और अहम सूत्र ....  
 
सबसे पहली बात बाहर से आप कितनी ही प्रेरणात्मक और सकारात्मक बातें कर लें लेकिन भीतर से आप नकारात्मक सोच रखते हैं, द्वेष, इर्ष्या, नफरत, अवसाद और दुख को पाले रखना ही पसंद करते हैं तो आप बस पॉजिटिव चीजों से खेलते रहे जाएंगे कोई परिवर्तन नहीं कर पाएंगे। 
 
होता क्या है, असल में आप अपनी दूसरी एक छवि गढ़ लेते हैं और वह होती है दुनिया के सामने पॉजिटिव रहने की....बड़ी बड़ी बातें करने की जबकि सच तो यह है कि आप जो बातें किसी और को लिखकर या पोस्टर के माध्यम से भेज रहे हैं उसकी जरूरत वास्तव में आपको ही है... इसलिए फ्रेंड्स आंखें खोलिए, खुद का सामना कीजिए...
 
अगर आप डिप्रेशन में है तो नाटक मत कीजिए सच को स्वीकार कीजिए कि हां में अवसाद ग्रस्त हूं... 
 
अब दूसरी बात जो खुद से कहनी है वो यह कि मैं इससे बाहर आना चाहती हूं या चाहता हूं... 
 
तीसरी बात कि इसके लिए मैं अपनी हर कोशिश, हर प्रयास को ईमानदार रखूंगा। 
 
चौथी बात बाहर की सकारात्मक बातों को पहले अपने मन के साथ मैच करूंगा या करूंगी कि क्या वास्तव में मैं ऐसा सोचता हूं या सोचती हूं... या क्या मैं सच में अच्छी सोच वाला हूं, आदर्श हूं अगर नहीं तो पहले अपने मन का खुद ही खुद से इलाज कीजिए। 
 
मन को स्वच्छ कीजिए, दर्पण में देखिए और फिर बाहरी मोटिवेशनल बातों को पढ़िए..वे तब ही असर करेगी जब आपका मन उसे ईमानदारी से स्वीकार करेगा।  
 
हम सबकी पहली लड़ाई पहले अपने आप से ही होती है। जब हम खुद को जीत लेते हैं तब हम दुनिया को जीत सकते हैं। 
 
खुद लड़ो अपनी लड़ाई तुम्हीं में हार छुपी है तुम्हीं में जीत.... 
 
किसी कविता की पंक्ति है ना 
इंसान जो मेहनत से छुता है आसमां, संग होता है उसके ही जहां, इस दुनिया को जीतेगा वो जो हारे न अपनी दुनिया को....
 
आपको मन में ठान लेना है कि मुझे कुछ कर दिखाना है तो पहले अपनी कमियों को दूर करना है और सारा फोकस अपनी ताकत पर कर देना है, फिर देखिए कैसे चमकती है जिंदगी, कैसे महकती है जिंदगी....  
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