दुनिया की सबसे बड़ी व्हेल ज्यादातर 'राइट हैंडेड': अध्ययन
Publish Date: Wed, 22 Nov 2017 (11:40 IST)
Updated Date: Wed, 22 Nov 2017 (11:46 IST)
दुनिया के सबसे बड़े जीव ब्लू व्हेल आम तौर पर अपना भोजन पकड़ने के लिए शरीर के दायें हिस्से का इस्तेमाल करते हैं। यह बिल्कुल उसी तरह से होता है जैसा "राइड हैंडेड" लोग अपने कामों के लिए करते हैं।
कुछ मौकों पर, जैसे कि उथले पानी में अपने शिकार पर नजर रखने के लिए यह जीव लगभग हमेशा अपने शरीर के बायें हिस्से का इस्तेमाल करते हैं। 'करंट बायलॉजी' में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक परिस्थिति के हिसाब से चुनाव का कारण सरल है, अपने मुंह में ज्यादा से ज्यादा भोजन को ले जा पाना।
स्वीडन में स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के सह-लेखक जेम्स हरबर्ट-रीड ने कहा कि यह पहला उदाहरण है, जब जीव अलग बर्ताव कर रहे हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि क्या काम किया जाना है। यह रिपोर्ट कैलीफोर्निया के तट पर 63 ब्लू व्हेल की गतिविधियों के अध्ययन पर आधारित है। यह विशालकाय जीव लगभग तीन स्कूल बसों के बराबर लंबे और 25 हाथियों के वजन के बराबर हैं।
वैज्ञानिकों ने शिकार से जुड़ी 2800 से भी ज्यादा गोतों का अध्ययन किया, जहां व्हेल ज्यादा से ज्यादा छोटी मछलियों को खाने के लिए उनके झुंड में से तेजी से गुजरती हैं, मुड़ती हैं या पलटती हैं। ज्यादातर ब्लू व्हेल गहरे पानी में दायीं ओर मुड़ती हैं, जहां अंधेरा है और बहुत सी छोटी मछलियां हैं। ऐसी स्थिति में अपने शिकार पर नजर रखने की कोई विशेष जरूरत नहीं होती है।
लेकिन जब पानी तीन से 30 मीटर के बीच होता है, तो ज्यादातर ब्लू व्हेल एक खड़े कोण पर बायीं ओर मुड़ना पसंद करती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिकार उथले पानी में कम मात्रा में होते हैं, और बायीं ओर चलने से व्हेल अपने लक्ष्य पर अपनी सही नजर रख सकती हैं।
रिसर्च के मुख्य लेखक एरी फ्रिडेंडर ने कहा कि ये ग्रह पर सबसे बड़े जानवर हैं और भोजन एक असाधारण तरीके से महंगा व्यवहार है, जो समय लेता है, इसलिए प्रत्येक अवसर के लाभ को अधिकतम इस्तेमाल करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "और हम मानते हैं कि यह बाएं तरफ का रोटेशन इसे हासिल करने में मदद करने के लिए एक तंत्र है।"
शोधकर्ताओं का मानना है कि जीवों की इस दुनिया में 'बाएं हाथ का' होना असामान्य है। वैज्ञानिकों को यह देखने के लिए अधिक व्हेलों का अध्ययन करने की आशा है, तभी साफ हो सकेगा कि क्या अन्य प्रजातियां भी ऐसा ही व्यवहार करती है या नहीं।
- एसएस/एएफपी