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लाल किताब अनुसार कुंडली को देखे बगैर बनाया मकान तो होगी बर्बादी

Lal kitab
कहते हैं कि यदि आपकी कुंडली के ग्रह बुरा फल दे रहे हैं लेकिन यदि आपका घर वास्तु के अनुसार है तो आप बहुत हद तक उन ग्रहों के बुरे प्रभाव से बच जाएंगे। इसका उल्टा भी है कि यदि आपकी कुंडली अच्छी है लेकिन आपका घर वास्तु के अनुसार नहीं है तो कुंडली के ग्रह बुरा फल देना प्रारंभ कर देंगे। इसके अलावा कुंडली की जांच करने के बाद ही घर का निर्माण करें, क्योंकि वास्तु में शनि का बहुत बड़ा रोल होता है।
 
 
1.राहु और केतु धरती के दो छोर है। उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव। सूर्य के प्रकाश के कारण जो छाया धरती के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर पड़ती है वह छाया है राहु और केतु। यह छह-छह माह की होती है। कुंडली का दशम भाव दक्षिणी छोर है या यह कहें कि धरती की धुरी है। स्वाभाविक रूप से चतुर्थ भाव उत्तरी ध्रुव होगा। मतलब यह कि उत्तर दिशा और दक्षिण दिशा जब कुंडली में तय हो गई तो फिर सभी दिशाएं भी तय हो गई।
 
 
2.कुंडली का वास्तु से संबंध और वास्तु का कुंडली से संबंध गहरा है। मकान के फल कई प्रकार के होते हैं जैसे स्वयं के द्वारा बनाया गया मकान, पिता और पुर्वजों द्वारा दिया गया मकान, ससुराल पक्ष का मकान, संतान द्वारा बनाया गया मकान अलग अलग फल देंगे। इसमें मकान का आकार, दिशा और कुंडली की शुभ और अशुभ दशा देखना होगी।
 
 
3.उदाहरणार्थ कुंडली में राहु यदि 12वें अथवा 8वें भाव में है तो मकान बनाते समय छत पर किसी भी प्रकार का अटाला रखने का स्थान न बनाएं या छत पर कूड़ा करकट, कोयला, कागज आदि का भंडारण स्थान कक्ष न बनवाएं। यदि मकान की छत पर तंदुर लगाया तो राहु कहीं भी हो वह कुंडली के 12वें घर में स्थापित हो जाएगा। ठीक दक्षिण दिशा में शौचायल होने से राहु छटे घर में स्थापित हो जाता है जो कुंडली में राहु के बुरे फल का नाश कर देता है।
 
 
4.जिस जातक का सूर्य ऊंचा हो उसे पूर्व दिशा के दरवाजे वाले मकान में रहना चाहिए जबकि शनी ऊंचा हो तो पश्चिम दिशा का दरवाजा शुभ फल देगा। इसी तरह कुंडली में अन्य ग्रहों की जांच करके ही दिशा का चयन करें।
 
 
5.जन्मकुंडली के खाना नंबर 1 में शनि हो और खाना नंबर 6, 7 और 10 में कोई ग्रह बैठा हो जिनकी आपस में बनती न हो या वे एक दूसरे को दूषित कर रहे हैं तो खाना नंबर 8 भी दूषित होगा या फिर जातक ने अपने कर्मों से दूषित कर लिया होगा। ऐसा जातक  अगर मकान बना ले तो रोटी-रोटी से मोहताज हो जाता है।
 
 
6.कुंडली के खाना नंबर 2 में शनि बैठा हो और कुंडली में शुक्र एवं मंगल ग्रह शुभ हो तो जातक अपना मकान जब और जैसा बने उसको बनने दें उसमें कोई दखल न दें तभी वह फलीभूत होगा। लेकिन यदि शनि खाना नंबर 3 में हो तो मकान तो बनेगा लेकिन 2 कुत्ते पालने होंगे वर्ना उसके घर में गरीबी का कुत्ता भोंकता रहेगा।
 
 
7.यदि शनि खाना नंबर 4 में हो और वो जातक नया मकान बनाने लगे तो उसके नाना के खानदान में, ससुराल के खानदान में और दादी या बुजुर्ग औरतों पर इसका बुरा असर होगा इसी तरह यदि शनि खाना नंबर 5 में हो तो औलाद पर बुरा असर होना शुरू होगा और नंबर 6. में हो तो अपना मकान 39 साल के बाद बनवाए वर्ना लड़कियों के रिश्तेदारों पर बुरा असर होगा।
 
 
8.शनि खाना नंबर 7 में होने पर जातक को अपना मकान खुद नहीं बनाना चाहिए बल्कि उसे हमेशा बना-बनाया मकान ही लेना चाहिए और यदि शनि खाना नंबर 8 में हो और शुक्र, मंगल ग्रह भी दूषित हो रहे हों तो जातक को अपने नाम से मकान नहीं बनवाया चाहिए। मकान बनवा रहे हैं तो उधर जाकर देखना भी नहीं चाहिए। वर्ना बर्बादी प्रारंभ हो जाएगी।
 
 
9.यदि जन्मकुंडली में शनि खाना नंबर 9 में हो और मकान बनाते समय घर की कोई महिला महिला गर्भवती तो उस जातक को अपनी कमाई से मकान नहीं बनाना चाहिए। उसके आगे-पीछे बना सकते हैं। इसी तरह अगर शनि खाना नंबर 10 में हो तो भी जातक को अपनी कमाई से मकान नहीं बनाना चाहिए। वह इस नियम का पालन करता है तो उसकी दौलत हमेशा बनी रहेगी।
 
 
10.शनि खाना नंबर 11 में हो तो वो जातक कभी भी मकान आदि दक्षिण दिशा का न बनाएं और न ही कभी शराब आदि का सेवन करें। वर्ना सेहत की कोई गारंटी नहीं। अगर मकान बनाना भी हो तो अपनी उम्र के 55 साल के बाद ही अपना मकान बनाएं। इसी तरह यदि शनि खाना नंबर 12 में हो तो मकान बनेगा और जैसा बने उसे बनने दें उसे रोके नहीं या उसमें अपना दिमाग ना लगाएं।
 
 
नोट : उपरोक्त विश्लेषण शनि के हिसाब से किया गया है। अन्य ग्रह देखकर भी स्थिति तय होती है कि मकान बनाना चाहिए या नहीं। यदि आपको लगता है कि मुझे तो मकान हर हाल में बनवाना है तो आप किसी लाल किताब के विशेषज्ञ से मिलें और उसकी सलाह लें या आप घर के किसी सदस्य के नाम पर मकान बनवाएं या वास्तु अनुसार बना बनाया मकान खरीद लें।
 
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