webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia

हिन्दी कविता : सूरज भैया

Widgets Magazine

 

डॉ.प्रमोद सोनवानी "पुष्प"

नित्य सवेरे उठकर कहती,
राजू को उसकी मैया।
पूरब में देखो तो राजू,
आए हैं भैया ।
 
लो सूरज की किरण परी भी,
चहुं दिशा को हरषाई।
पानी में देखो सूरज की,
चमक रही है परछाई।
Read more on : सूरज भैया सूरज हिन्दी कविता सूरज पर कविता बाल कविता बाल साहित्य Kavya Sansar Sooraj Bhaiya Child Poem Hindi Kavita Bal Kavita Bal Sahitya Hindi Poem