Published: Tue, 10 Mar 2026 (10:40 IST)
Updated: Tue, 10 Mar 2026 (10:49 IST)
सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन के प्रकाश में,
खोला है सुधारों का यह द्वार हमने।
अनेक जागरूक देशों की सुधार की पहल को,
किया है सहर्ष अंगीकार हमने।।1।।
कितनी निरीह अबलाओं, परित्यक्ताओं, रंजजदाओं,
की सुनी है कातर, करुण, हृदयदाही पुकार हमने।
धर्म, वर्ग, संप्रदाय, रूढ़ि, अंधविश्वासों से ऊपर उठकर,
मानवीय न्याय को दी है रफ्तार हमने।।2।।
दकियानूसी सोच, निहित स्वार्थ,
व्यवस्थाओं के दूषित रूपांतरणों को
किया है शालीनता से दरकिनार हमने।
एक साहसिक पहल से (अनगिनत अबलाओं की दुआओं के साथ),
आगामी पीढ़ियों पर किया है उपकार हमने।।3।।