हिन्दी कविता : जिंदगी पेन है
Published: Tue, 10 Mar 2026 (10:40 IST)
Updated: Tue, 10 Mar 2026 (10:49 IST)
- अभिषेक कुमार अम्बर
जिंदगी पेन है
उसके रिफिल हो तुम
पेन की पाई जाती हैं किस्में बहुत
कोई मोंटेक्स है कोई पॉयलेट है
पेन महंगे हैं जो उनकी इक ख़ासियत
मन करें जब आप रिफिल बदल सकते हो
लेकिन मैं पेन हूं 3 रुपए वाला
जिसमें ऐसी कोई ख़ासियत तो नहीं
इक कमी है मगर
ये टूट जाएगा पर रिफिल बदलता नहीं।