webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. poem on kaal kram

कविता : कालक्रम

poem on kaal kram
काल की अनंतता का प्रवर्तन, 
शून्य के वृत्त का सनातन आवर्तन।
 
वर्तमान की चेतना से काल का आरंभ, 
प्रसूत अद्यतन क्षण का प्रारंभ।
 
प्रवाहित है अतीत की ओर, 
साथ ही बहता है भविष्य का शोर।
 
दोनों ओर समगतित्व, 
नैरंतर्य पुनरागमित अमरत्व।
 
नटराज की काल-डमरू मध्य, 
ब्रम्ह्नाद अघोष से आबद्ध।
 
अतीत और भविष्य का मान, 
प्रवाहित है साध्य वर्तमान।
 
काल का वृत्त निरपेक्ष चिरप्रवाही, 
अतीत से अनुगामित अनुप्रवाही।
 
कालजित भविष्य को समेटे, 
चिरंतर वर्तमान में स्वयं को लपेटे।
 
जीवन संयुक्त अथवा जीवनमुक्त, 
सनातन नित्य एवं विविक्त।
 
निरवधि, प्रवाहमान प्रत्यावर्ती पुरातन कर्म, 
अविखंडनीय कालाणुओं का सनातन धर्म।
ये भी पढ़ें
गर्भवती होने के लिए 10 आसान उपाय