lock down poem : पथिकों की डगर को मखमली रखना
Published: Tue, 10 Mar 2026 (10:40 IST)
Updated: Tue, 10 Mar 2026 (10:49 IST)
भगवन मेरे,
पथिकों की डगर को
मखमली रखना
हाथों को
निवाले भी
उजास भी
पूरा का पूरा
रहने देना सूरज में
चांद की शीतलता
और ठंडाये रखना
शिशुओं की
खिल-खिल मुस्कान
फूलों की खुशबुएँ
पौधों का हरा
नदियों का कलरव
घर-परिवार
आंगन-औसारा
मेहंदी के हाथ
हल्दी के पांव
नेग-शगुन,
शहनाई
थिरकते मन
सब कुछ
पूरा का पूरा
लौटाना है तुम्हें ही,
बिना किसी कतरब्योंत के।