webdunia
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. holi poem

कविता : होली के मुक्तक

फागुन
धक-धक-सी महकी सांसें हैं, मदहोशियां छाईं, 
झूमे पलाश मदमस्त सा, जामुनिया भी बौराई।
मन-मयूरा नाचे ता धिक, आज पी के भंग तरंग,
अंबर है लाल, गाल गुलाल, मस्तानियां छाईं।
 
मनमोहना ने रंग दी, मोरी ये चुनरिया,
फागुन के जैसी प्रीत भरे सारी उमरिया।
घूंघट के पट से देखूं, होली का ये धमाल,
बलखाता सा यौवन है, बहकी है गुजरिया।
 
नैना तुझे ही ढूंढ रहे, आ मेरे हमजोली,
छुप-छुपके अब यूं ना कर, हमसे ये ठिठोली।
लेकर के आई प्रीत के, रंगों से भरा थाल,
मल दे गुलाल रंग दे गुलाल, आ खेल ले होली।

( ! ) Warning: Unknown: Write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

( ! ) Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0