नयनों की पुकार है उस आंख वाले को जो नासमझ बना है जो नि:शब्द आगे बढ़ा है। नजर ना आया जिसे नयनों का गर्म नीर नजरअंदाज की जिसने चोट खाती हुई पीर। वेदना के क्षण भूला आंखों का सपना टूटा ढलती शाम-सा जीवन में अंधेरे का पुष्प खिला।...