हमसे भी और तुमसे भी, तो बढ़ने को कहती रही। नदी सदा बहती रही, नदी सदा बहती रही। 1. पाषाणों की गोदी हो, या रेतीली धरती। अपने दिल का हाल, भला कब अपनों को कहती। चोट हृदय में अपने वो, सदियों से सहती रही। नदी सदा...