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Pradosh Vrat December 2025: दिसंबर माह में पड़ेंगे दो प्रदोष व्रत, जानें महत्वपूर्ण तिथियां और महत्व

Pradosh Vrat in December
December 2025 Pradosh Vrat: हिन्दू पंचांग कैलेंडर के अनुसार इस बार दिसंबर 2025 में दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे, जो विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रदोष व्रत का आयोजन हर महीने की त्रयोदशी तिथि को होता है, और जब यह व्रत त्रयोदशी तिथि के दिन पड़ता है, तो उसे विशेष महत्व प्राप्त होता है।ALSO READ: Mesh Rashi Varshik rashifal 2026 in hindi: मेष राशि 2026 राशिफल: बृहस्पति से मिलेगा साढ़ेसाती को काबू में रखने का उपाय

इन व्रतों का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख, और आर्थिक समृद्धि मिलती है। इसलिए, इन तिथियों पर प्रदोष व्रत रखना अत्यंत लाभकारी होता है। यह व्रत कर्ज मुक्ति, रोग निवारण और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
 
दिसंबर माह में प्रदोष व्रत की तिथियां (2025):
 
1. पहला प्रदोष व्रत:
 
* तिथि: 2 दिसंबर 2025
* दिन: मंगलवार
* पक्ष: शुक्ल पक्ष (तिथि: त्रयोदशी)
 
2. दूसरा प्रदोष व्रत:
 
बुध प्रदोष व्रत
17 दिसंबर 2025, 
* तिथि: 17 दिसंबर 2025
* दिन: बुधवार
* पक्ष: कृष्ण पक्ष (तिथि: त्रयोदशी)
 
प्रदोष व्रत पूजन के शुभ मुहूर्त और समय: 
 
भौम प्रदोष व्रत : 2 दिसंबर 2025, मंगलवार
 
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 02 दिसंबर को 03:57 पी एम से, 
त्रयोदशी तिथि का समापन- 03 दिसंबर को 12:25 पी एम पर।
 
भौम प्रदोष व्रत पूजन का समय: 05:24 पी एम से 08:07 पी एम तक।
त्रयोदशी पूजा अवधि: 02 घण्टे 43 मिनट्स
 
बुध प्रदोष व्रत: 17 दिसंबर 2025, बुधवार
 
पौष कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 16 दिसंबर से 11:57 पी एम से, 
पौष कृष्ण त्रयोदशी की समाप्ति- 18 दिसंबर को 02:32 ए एम पर होगा। 
 
बुध प्रदोष व्रत पूजन का समय: 05:27 पी एम से 08:11 पी एम तक। 
त्रयोदशी पर पूजन की अवधि: 02 घण्टे 44 मिनट्स
 
प्रदोष व्रत का महत्व: प्रदोष व्रत का आयोजन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और उनके आशीर्वाद के लिए किया जाता है। यह व्रत मानसिक शांति, स्वास्थ्य में सुधार, और जीवन में समृद्धि लाने के लिए माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का पूजन किया जाता है, साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' का जाप किया जाता है, जिससे जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति प्राप्त होती है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Lal Kitab Mithun Rashifal 2026: मिथुन राशि (Gemini)- शनि कराएगा कड़ी मेहनत और गुरु देगा उसका अप्रत्याशित फल