webdunia

Select Your Language

Notifications

webdunia
  1. धर्म-संसार
  2. ज्योतिष
  3. आलेख
  4. benefits of 14 rudraksh

14 रुद्राक्ष की सटीक जानकारी, हर रुद्राक्ष देता है आश्चर्यजनक लाभ, पढ़कर विश्वास नहीं होगा

रुद्राक्ष क्या है
शिव तथा रुद्राक्ष एक-दूसरे के पर्याय हैं। शिव साक्षात् रुद्राक्ष में वास करते हैं। जनसाधारण रुद्राक्ष के महत्व को जानते हैं। रुद्राक्ष एकमुखी से चौदहमुखी तक पाए जाते हैं। शैव संप्रदाय हमारे यहां बहुलता से होते हैं। शिव तो राम, कृष्ण व विष्णु के भी आराध्य रहे हैं। रुद्राक्ष माला से जप करने तथा धारण करने से करोड़ों पुण्यों की प्राप्ति होती है। प्रत्येक रुद्राक्ष के कोई न कोई अधिष्ठाता ग्रह तथा देवता होते हैं। इन्हें धारण कर अलग-अलग लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं-
 
1. एकमुखी रुद्राक्ष : इन्हें साक्षात शिव माना गया है। पापों का नाश, भय तथा चिंता से मुक्ति, लक्ष्मी प्राप्ति धारणकर्ता को स्वमेव ही प्राप्त होता है। इसके ग्रह सूर्य हैं। धारणकर्ता को शिवजी के साथ सूर्य देवता का भी आशीर्वाद मिलता है।
 
2. दोमुखी रुद्राक्ष : यह हर गौरी यानी अर्द्धनारीश्वर का रूप है। इसका ग्रह चन्द्रमा है। इसे धारण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। इसे धारण करने से एकाग्रता व शांति प्राप्त होती है। वशीकरण की शक्ति प्राप्त होती है। स्त्री रोग, आंख की खराबी, किडनी की बीमारी दूर करता है।
 
3. तीनमुखी रुद्राक्ष : यह ब्रह्म स्वरूप है तथा इसके देवता मंगल हैं। इसे धारण करने से वास्तुदोष, आत्मविश्वास में वृद्धि, ज्ञान प्राप्ति में लाभ होता है। संक्रामक रोग, स्त्री रोगों आदि में लाभ देता है।
 
4. चारमुखी रुद्राक्ष : इसके देव ब्रह्मा तथा ग्रह बुध देवता हैं। इसके धारण करने से सम्मोहन की शक्ति आती है। नाक, कान व गले के रोग, कोढ़, लकवा, दमा आदि रोग में लाभ देता है।
 
5. पंचमुखी रुद्राक्ष : इसके देवता रुद्र तथा ग्रह बृहस्पति हैं। इसे धारण करने से कीर्ति, वैभव तथा संप‍न्नता में वृद्धि होती है। किडनी के रोग, डायबिटीज, मोटापा, पीलिया आदि में लाभ देता है।
 
6. छहमुखी रुद्राक्ष : इसके अधिष्ठाता देवता गणेश एवं कार्तिकेय हैं। ग्रह देवता शुक्र हैं। कोढ़, नपुंसकता, पथरी, किडनी तथा मूत्र रोग आदि के लिए धारण कर सकते हैं।
 
7. सातमुखी रुद्राक्ष : इसमें सप्त नाग निवास करते हैं। सप्त ऋषि तथा अनंग देवता अधिष्ठाता हैं। इसके ग्रह शनि महाराज हैं। शारीरिक दुर्बलता, उदर रोग, लकवा, चिंता, हड्डी रोग, कैंसर, अस्थमा, कमजोरी आदि के लिए धारण करते हैं।
 
8. आठमुखी रुद्राक्ष : इसमें कार्तिकेय गणेश, अष्टमातृका, अष्ट बसु हैं। इसके ग्रह राहु हैं। अशांति, सर्पभय, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि में धारण किया जाता है।
 
9. नौमुखी रुद्राक्ष : नौ दुर्गा तथा भैरव इसके देवता हैं तथा ग्रह केतु है। फेफड़े, ज्वर, नेत्र रोग, कर्ण रोग, संतान के लिए, उदर कष्ट, संक्रामक रोगों में शांति के लिए धारण किया जाता है।
 
10. दसमुखी रुद्राक्ष : भगवान विष्णु, 10 दिक्पाल तथा दश महाविद्याएं देवता हैं। सभी ग्रह देवता हैं। इसके धारण करने से नवग्रह शांति तथा कफ संबंधी, फेफड़े संबंधी हृदय रोग आदि में लाभ होता है।
 
11. ग्यारहमुखी रुद्राक्ष : सभी 11 रुद्र इसके देवता हैं। सभी ग्रह प्रसन्न होते हैं यदि इसे धारण किया जाए। स्त्री रोग, जोड़ तथा स्नायु रोग, वीर्य संबंधी रोग में लाभ देता है।
 
12. बारहमुखी रुद्राक्ष : इसके देवता तथा ग्रह सूर्य हैं। इसे धारण करने से तेजस्वी तथा ऐश्वर्य वृद्धि होती है। सिरदर्द, गंज, बुखार, नेत्र रोग, हृदय रोग, मूत्राशय आदि में लाभ देता है।
 
13. तेरहमुखी रुद्राक्ष : इसके देवता कामदेव हैं तथा सभी ग्रह हैं। आकर्षण-वशीकरण, सुन्दरता, समृद्धि आदि में लाभ होता है। मूत्राशय, नपुंसकता, गर्भ संबंधी रोग, किडनी, लिवर संबंधी समस्याएं दूर करता है।
 
14. चौदहमुखी रुद्राक्ष : इसके देवता श्रीकंठ तथा हनुमानजी हैं। तंत्र-मंत्र, टोने-टोटके, भूत-प्रेत, पिशाच-डाकिनी आदि से रक्षा करता है। निराशा, बेचैनी, भय, लकवा, कैंसर, भूत-प्रेत बाधा आदि में आश्चर्यजनक लाभ देता है।
 
उपरोक्त वर्णन रुद्राक्ष का परिचय है। इसके धारण या एकाधिक रुद्राक्ष धारण कर लाभ लिया जा सकता है।

ये भी पढ़ें
शहीद चंद्रशेखर आजाद अपनी शायरी में भी भर देते थे क्रांतिकारी रंग