Publish: Tue, 10 Feb 2026 (12:22 IST)
Updated: Tue, 10 Feb 2026 (12:28 IST)
कोटद्वार (उत्तराखंड): "ईमानदारी और इंसानियत की शायद यही कीमत है।" यह शब्द उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी 38 वर्षीय दीपक कुमार के हैं, जिन्हें आज पूरी दुनिया 'मोहम्मद दीपक' के नाम से जान रही है। 26 जनवरी 2026 को एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की ढाल बनने वाले दीपक आज अपने ही शहर में आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं।
क्या थी वह घटना जिसने दीपक को बनाया 'हीरो'?
गणतंत्र दिवस के दिन कोटद्वार के पटेल मार्ग पर 70 वर्षीय वकील अहमद (जो पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित हैं) की दुकान के बाहर 'बजरंग दल' के कार्यकर्ता जुटे थे। भीड़ का दबाव था कि दुकान के नाम से "बाबा" शब्द हटाया जाए। जब भीड़ उग्र होने लगी, तो जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे और बुजुर्ग के बचाव में खड़े हो गए।
जब भीड़ ने उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने गरजते हुए कहा— "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है!" यह उनके विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका था, जिससे वे यह संदेश देना चाहते थे कि धर्म से ऊपर इंसानियत है।
वीरान हुआ जिम: 150 से घटकर रह गए 15 सदस्य
दीपक कोटद्वार में 'हल्क जिम' (Hulk Gym) चलाते हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर तो उन्हें 'भारत का हीरो' कहा गया, लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है
मेंबरशिप में गिरावट: पहले जिम में 150 सदस्य थे, जो अब घटकर मात्र 15 रह गए हैं।
आर्थिक बोझ: जिम का मासिक किराया 40,000 है और घर के लोन की किश्त 16,000 जाती है।
अकेले कमाने वाले: परिवार में दीपक अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। लोगों में डर और विरोध के कारण उनके व्यापार पर गहरा असर पड़ा है।
देश भर से मिल रहा समर्थन: नेताओं की एकजुटता दीपक की इस बहादुरी को राजनीति और समाज के विभिन्न वर्गों से सराहना मिली है:
राहुल गांधी का बयान: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दीपक को "मोहब्बत की दुकान" का सच्चा सिपाही बताया।
सीपीएम सांसद की पहल: सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने खुद कोटद्वार जाकर दीपक से मुलाकात की। एकजुटता दिखाने के लिए उन्होंने दीपक के जिम की सालाना मेंबरशिप भी ली।
इनाम ठुकराया: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दीपक को 2 लाख का इनाम देने की घोषणा की थी, लेकिन दीपक ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह राशि अंकिता भंडारी के परिवार को दी जानी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर सवाल: हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने दंगाइयों के साथ-साथ दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है, जिसका विपक्षी नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं।
"मैं डरा नहीं हूँ"
तमाम मुश्किलों और धमकियों के बावजूद दीपक अडिग हैं। उनका कहना है, "मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया है। बाहर के लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं, लेकिन शहर के लोग अभी डरे हुए हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।"
Edited By: Naveen R Rangiyal