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हज के नियम : क्या करें, क्या ना करें

Webdunia
गुरुवार, 7 जुलाई 2022 (14:38 IST)
हज या हज्ज का अर्थ होता है तीर्थयात्रा। प्रतिवर्ष मुस्लिम लोग सऊदी अरब में स्थित मक्का की यात्रा करते हैं जहां पर पवित्र काबा स्थित है। पवित्र काबा सऊदी अरब के हेजाज प्रांत की राजधानी मक्का में स्थित है। मक्का शहर वार्षिक हज तीर्थयात्रा, जो इस्लाम के 5 स्तंभों में एक है, के लिए प्रसिद्ध है। 
 
यहां प्रत्येक वर्ष मुहर्रम माह में लगभग 20 से 25 लाख हजयात्री आते हैं। यहां काबा के अलावा मस्जिद-अल-हरम भी स्थित है। मक्का में ही पैगंबर हजरत मुहम्मद अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ था। पैगंबर हजरत इब्राहीम ने मक्का में काबा को सबसे पहले पवित्र जगह बनाया था। यहां उन्होंने ही पुनर्निर्माण कार्य किया था।
 
क्या करें : हज का पूरा तरीका यह है कि पहले 'तवाफे वुकूफ' करते हैं। हजरे असवद (काला पत्थर) को चूमते हैं फिर सफा और मरवा दोनों पहाड़ियों के बीच दौड़ते हैं। 8 जिलहिज्जा को फज्र की नमाज पढ़कर मिना चल देते हैं। रात को मिना में रहते हैं। 9 जिलहिज्जा को गुस्ल करके अरफात के मैदान की तरफ रवाना होते हैं। वहां शाम तक ठहरते हैं। अरफात में जौहर और अस्र की नमाज इकट्ठी पढ़ते हैं। सूरज डूबने के बाद मुज्दल्फा की तरफ रवाना हो जाते हैं। वहां मगरिब और ईशा की नमाज इकट्ठी पढ़ी जाती है। रात में मुज्दल्फा में ही ठहरते हैं।
 
10 जिल्हज्जा को फज्र की नमाज बाद मिना की ओर रवाना हो जाते हैं। दोपहर से पहले पहले मिना में पहुंचकर जमरा में सात बार कंकरियां फेंकते हैं। रमी (कंकरियां मारने) के बाद तल्बिया कहना बंद कर देते हैं। फिर कुरबानी करके सिर के बाल मुंडवाते या कतराते हैं और इहराम उतारकर अपने कपड़े पहन लेते हैं। मिना में 12 जिल्हज्जा तक रहते हैं। जिल्हज्जा की 12 तारीख खत्म होते ही हज पूरा हो जाता है। हज से फारिग होकर प्यारे रसूल सल्ल. की पाक बस्ती की जियारत करते हैं। खाना-काबा की जियारत के बाद प्यारे रसूल सल्ल. की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं। आप सल्ल. पर दरूद और सलाम भेजते हैं और दीन-दुनिया की दौलत से मालामाल होकर वापस लौटते हैं।
क्या न करें :
1. हज के लिए सिर्फ वहीं व्यक्ति सऊदी अरब के मक्का की यात्रा कर सकते हैं जिनकी उम्र 65 साल से कम की है। 
2. कोरोना की दोनों वैक्‍सीन के साथ-साथ सऊदी अरब में प्रवेश के 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट दिखानी भी अनिवार्य है। इसके अलावा फेसमास्‍क लगाना जरुरी है।
3. अकेली महिला हज नहीं कर सकती। अगर कोई महिला बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के हज यात्रा करना चाहती है तो इसके लिए उसकी उम्र 45 साल से अधिक होनी चाहिए। साथ ही महिला को चार अन्य महिलाओं का साथ होना जरूरी है जिनकी उम्र भी 45 से अधिक हो। 
4. जिस पर कर्ज हो वो हज नहीं कर सकता। दूसरा कर्ज लेकर भी हज नहीं किया जा सकता।
5. हराम के पैसे से भी हज नहीं किया जा सकता। 
6. हज में पवित्रता, अदम और पर्दे का ध्यान रखना होगा। इनके बगैर हज नहीं कर सकते। 
7. रंग बिरंगे कपड़े पहनकर हज नहीं कर सकते। हज में सिर्फ सफेद कपड़े पहने जाते हैं।

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