Aravalli hills: अरावली पहाड़ियों का क्या है पौराणिक महत्व, नष्ट हो जाएगा सबकुछ
Aravalli hills: भारत की भौगोलिक संरचना में अरावली प्राचीनतम पर्वत है। भू-शास्त्र के अनुसार भारत का सबसे प्राचीन पर्वत अरावली का पर्वत है। अरावली पर्वत प्राचीन भारत के सप्तकुल पर्वतों में से एक है। इसे भी हिन्दूकुश पर्वत की तरह पारियात्र या पारिजात पर्वत कहा जाता है। वह इसलिए कि यहां पर पारिजात वृक्ष पाया जाता है। माना जाता है कि यहीं पर श्रीकृष्ण ने वैकुंठ नगरी बसाई थी। राजस्थान में यह पहाड़ नैऋत्य दिशा से चलता हुआ ईशान दिशा में करीब दिल्ली तक पहुंचा है। अरावली या 'अर्वली' उत्तर भारतीय पर्वतमाला है।
कितना लंबा है आरावली पर्वक्ष श्रृंखला क्षेत्र: अगर गुजरात के किनारे अर्बुद या माउंट आबू का पहाड़ उसका एक सिरा है तो दिल्ली के पास की छोटी-छोटी पहाड़ियां धीरज (The Ridge) दूसरा सिरा। आबू के पहाड़ का सबसे ऊंचा शिखर सिरोही जिले में गुरुशिखर 1727 मी. से भी अधिक ऊंचा है जबकि धीरज टेकरियों की ऊंचाई 50 फुट की ही होगी। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, पंजाब आदि राज्यों में इस पर्वत की श्रृंखलाएं फैली हुई हैं। ऋग्वेद में अर्बुद नामक असुर का जिक्र आता है।
नष्ट कर रहे हैं अरावली को: अरावली पर्वत श्रृंखला कई प्राकृतिक और खनिज संपदाओं से लबरेज है। यह पर्वत श्रेणी क्वार्ट्ज चट्टानों से निर्मित है। इनमें सीसा, तांबा, जस्ता आदि खनिज पाए जाते हैं। यहां की अधिकतर चट्टानें देशभर में लोगों के घर का फर्श बनकर नष्ट हो गई हैं।
सिंधु को लांघकर मध्यप्रदेश की ओर जाते यह पहाड़ और उसकी अनेक शाखाएं आड़ी आती हैं इसलिए इसका 'आडावली' नाम पड़ा होगा। आडावली के पहाड़ बड़े हों या छोटे, वनस्पति-सृष्टि को आज भी प्रश्रय देते हैं और उन जंगलों में शेर, चीता आदि वन्य पशुओं को भी प्रश्रय मिलता है और यहां कई पहाड़ी वन्य जातियां भी उसके आश्रय से कृतार्थ होकर लोकगीतों में अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं। इस पर्वतमाला में केवल दक्षिणी क्षेत्र में सघन वन हैं अन्यथा अधिकांश क्षेत्रों में यह विरल, रेतीली एवं पथरीली है।
नदियां: अरावली परिसर में जन्म लेने वाली नदियों की संख्या भी कम नहीं है। वेदस्मृति (बनास), वेदवती (बेरछ), वृत्रघ्नी (उतंगन), सिंधु (काली सिंध), वेण्या या वर्णाशा नंदिनी अथवा चंदना (साबरमती), सदानीरा या सतीरापारा (पार्वती), चर्मण्वती या धन्वती (चंबल), तूपी या रूपा या सूर्य (गंभीर), विदिशा या विदुषा (बेस), वेत्रवती या वेणुमती (बेतवा), शिप्रा या अवर्णी या अवंती।
प्रमुख चोटियां हैं-
* सेर- 1597 मीटर
* अचलगढ़- 1380 मीटर
* देलवाड़ा- 1442 मीटर
* आबू- 1295 मीटर
* ऋषिकेश- 1017 मीटर
आरावली के तीर्थ:
आरावली पर्वत क्षेत्र में पर्वत की घाटियों के मध्य चारों ओर जंगलों से घिरे रणकपुर में भगवान ऋषभदेव का चतुर्मुखी जैन मंदिर है। रणकपुर मंदिर उदयपुर से 96 किलोमीटर की दूरी पर है। देशभर में मां शाकंभरी के तीन शक्तिपीठ हैं इसमें से दो आरावली पर्वत क्षेत्र में स्थित हैं। महाभारत काल में पांडव अपने भाइयों व परिजनों का युद्ध में वध (गोत्र हत्या) के पाप से मुक्ति पाने के लिए अरावली की पहाड़ियों में रुके थे। महाभारत के अनुसार यह क्षेत्र असुर राज वृषपर्व के साम्राज्य का एक भाग था और यहां पर असुरों के कुलगुरु शुक्राचार्य निवास करते थे। इसी स्थान पर शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का विवाह नरेश ययाति के साथ संपन्न हुआ था। देवयानी को समर्पित एक मंदिर झील के पास स्थित है। एक अन्य मान्यता के अनुसार शाकंभरी देवी चौहान राजपूतों की रक्षक देवी हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका के बाद एक ओर नगर बसाया था जिसे वैकुंठ कहा जाता था। कुछ इतिहासकारों के मुताबिक अरावली की पहाड़ी श्रृंखला पर कहीं वैकुंठ धाम बसाया गया था, जहां इंसान नहीं, सिर्फ साधक ही रहते थे।